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46 मजदूरों से भरी पिकअप 4 बार पलटी, 16 की मौत; NHAI की लापरवाही पर भड़के DIG

धार | इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर बीती रात एक ऐसी चीख-पुकार मची जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। मजदूरों से ठसाठस भरी एक पिकअप अनियंत्रित होकर काल का ग्रास बन गई। तिरला क्षेत्र के रहने वाले ये मजदूर बगड़ से अपने गांव लौट रहे थे, लेकिन घर पहुंचने से पहले ही 16 परिवारों के चिराग बुझ गए। 30 घायल जिंदगी और मौत के बीच अस्पतालों में जंग लड़ रहे हैं।

हादसे का मंजर: 4 पलटी खाकर पिचक गई गाड़ी

​चश्मदीदों के मुताबिक, जिओ पेट्रोल पंप के पास पिकअप की रफ्तार इतनी तेज थी कि ड्राइवर ने संतुलन खोया और वाहन ने एक के बाद एक तीन से चार पलटी खाई। चीख-पुकार मचते ही राहगीर मदद को दौड़े। गाड़ी में महिलाएं, पुरुष और मासूम बच्चे भी सवार थे। मौके पर जमीन खून से लाल हो चुकी थी और चारों तरफ बिखरा हुआ सामान इस भीषण त्रासदी की गवाही दे रहा था।

क्या यह सिर्फ हादसा है या NHAI की ‘हत्या’?

​घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंचे डीआईजी (ग्रामीण) मनोज कुमार सिंह ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मौके पर जो खामियां मिलीं, वे चौंकाने वाली हैं:

    • गायब थे इंडिकेटर: सड़क के कट पर न तो कोई इंडिकेटर लगा था और न ही ब्लिंकर्स। अंधेरे में ड्राइवर को कट का अंदाजा ही नहीं लगा।
    • डिवाइडर का ‘डेथ ट्रैप’: दोनों साइड के डिवाइडर के बीच 5 से 6 फीट की दूरी है, जो ड्राइवर के लिए भ्रम (Confusion) पैदा करती है।
    • इंजीनियर का लचर तर्क: जब डीआईजी ने इंजीनियर को फटकारा, तो उसका कहना था कि हादसा होने से इंडिकेटर टूट गए। सवाल यह है कि अगर पुराने हादसे में टूटे थे, तो उन्हें समय पर सुधारा क्यों नहीं गया?

​”धार जिला रोड सेफ्टी में अच्छा काम कर रहा था, मौतों में 21% की कमी आई थी, लेकिन इस घटना ने सब बदल दिया। NHAI की तकनीकी त्रुटियां साफ दिख रही हैं। हम उन्हें नोटिस जारी करेंगे।”

मनोज कुमार सिंह, डीआईजी ग्रामीण

 

प्रशासनिक हलचल: सीएम और पीएम ने जताया दुख

​हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय से संवेदना संदेश जारी किए गए हैं। प्रभारी कलेक्टर अभिषेक चौधरी और एसपी मयंक अवस्थी ने राहत कार्यों का जायजा लिया। मध्य प्रदेश शासन और जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के लिए सहायता राशि की घोषणा की है।

अब आगे क्या?

​डीआईजी ने स्पष्ट किया है कि अब केवल पत्र व्यवहार नहीं होगा, बल्कि पूरे जिले के नेशनल हाईवे का ‘सेफ्टी ऑडिट’ किया जाएगा।

      1. ​सभी ‘मीडियन कट्स’ की जांच होगी।
      2. ​जहां साइन बोर्ड नहीं हैं, वहां तत्काल लगवाए जाएंगे।
      3. ​ओवरस्पीडिंग रोकने के लिए विशेष अभियान चलेगा।

बड़ा सवाल: क्या प्रशासन की यह सख्ती सिर्फ कुछ दिनों के लिए है, या भविष्य में मासूम मजदूरों की जान बचाने के लिए कोई ठोस नीति बनेगी?

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