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तपती गर्मी में बेजुबान पक्षियों को मिला ‘सकोरों’ का सहारा

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जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत कुक्षी में अनूठी पहल

धार। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा चलाए जा रहे ‘जल गंगा संवर्धन अभियान 2026’ के तहत आज कुक्षी विकासखंड में इंसानियत और प्रकृति प्रेम की एक खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। भीषण गर्मी के प्रकोप को देखते हुए बेजुबान पक्षियों के लिए प्याऊ (मिट्टी के सकोरे) लगाने का विशेष अभियान शुरू किया गया है।

जनपद पंचायत प्रांगण से उठी ‘जीव-दया’ की गूँज

​कुक्षी जनपद पंचायत कार्यालय में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी मनीषा रावत और जन अभियान परिषद के विकासखंड समन्वयक मनीष शर्मा ने खुद अपने हाथों से मिट्टी के सकोरे वितरित किए। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने केवल सकोरे बांटे ही नहीं, बल्कि कार्यालय के बगीचे और पेड़ों पर खुद पानी भरकर इन्हें टांगा भी।

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‘एक छोटा कदम, बड़ी राहत’

​उपस्थित नागरिकों और स्टाफ को संबोधित करते हुए जनपद CEO मनीषा रावत ने कहा:

​”प्रचंड गर्मी के इस मौसम में हम तो अपनी प्यास बुझा लेते हैं, लेकिन बेजुबान पक्षी पानी की बूंद-बूंद के लिए भटकते हैं। अपनी छत या बालकनी पर एक सकोरा रखना भले ही छोटा काम लगे, लेकिन यह प्रकृति के प्रति हमारी संवेदनशीलता का बड़ा प्रमाण है।”

उन्होंने आह्वान किया कि हर नागरिक अपने घर की छतों और सार्वजनिक स्थानों पर पक्षियों के लिए दाना और पानी की व्यवस्था अवश्य करे।

बख्शी जी का समर्पण बना मिसाल

​इस अभियान में एक खास जिक्र ‘बख्शी जी’ का हुआ, जो जनपद कार्यालय के बगीचे की नियमित देखरेख करते हैं। उनकी तत्परता की सराहना करते हुए बताया गया कि वे निरंतर पक्षियों के लिए दाना-पानी सुनिश्चित कर रहे हैं। उनके इस निस्वार्थ कार्य ने पूरे अभियान को एक नई ऊर्जा और मजबूती प्रदान की है।

पर्यावरण और जल संवर्धन का सामूहिक संकल्प

​कार्यक्रम के दौरान जन अभियान परिषद के कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने संकल्प लिया कि वे न केवल जल स्रोतों के संवर्धन पर काम करेंगे, बल्कि जीव-जंतुओं के संरक्षण के लिए भी सक्रिय रहेंगे।

मुख्य आकर्षण:

  • प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी: जीव-दया और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश।
  • मिट्टी के पात्रों का उपयोग: प्लास्टिक के बजाय पारंपरिक सकोरों को बढ़ावा।
  • जनभागीदारी: कार्यालय स्टाफ से लेकर आम नागरिकों तक की सक्रिय मौजूदगी।

​’जल गंगा संवर्धन अभियान’ केवल नदियों या तालाबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर उस जीवन को बचाने का मिशन है जो इस धरती का हिस्सा है। कुक्षी की यह पहल निश्चित रूप से अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणा बनेगी।

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