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‘पैसा नहीं तो काम नहीं’: धार में आशा-उषा कार्यकर्ताओं का हल्लाबोल

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आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

धार। “पेट में भूख और हाथ में काम नहीं, अब बिना वेतन हम मानेंगे नहीं!” कुछ इसी तेवर के साथ धार जिले की हजारों आशा, उषा कार्यकर्ता और पर्यवेक्षक आज शुक्रवार, 15 मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर उतर गई हैं। पिछले 3 महीनों से वेतन की बाट जोह रहीं इन स्वास्थ्य सखियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं होता, जिले भर में स्वास्थ्य सेवाएं ठप रहेंगी।

क्यों थमीं जिले की स्वास्थ्य सेवाएं?

​धार जिले के सभी विकासखंडों में स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली आशा और उषा कार्यकर्ताओं का सब्र अब टूट चुका है। हड़ताल का मुख्य कारण पिछले 90 दिनों से मानदेय (वेतन) न मिलना है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वेतन के अभाव में उनके चूल्हे बुझने की नौबत आ गई है और घर-परिवार चलाना नामुमकिन हो गया है।

“हमने 8 मई को ही अल्टीमेटम दे दिया था। कलेक्टर और CMHO को ज्ञापन सौंपकर कहा था कि अगर 14 मई तक पैसा नहीं आया, तो 15 से काम बंद कर दिया जाएगा। प्रशासन ने हमारी चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया, जिसका परिणाम आज की ये हड़ताल है।”

संगीता मारू मोयाखेड़ा, जिलाध्यक्ष (आशा-उषा सहयोगी संगठन)

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अधिकारियों के रवैये से आक्रोश: ‘काम चाहिए, पर दाम नहीं’

​इंदौर संभागीय अध्यक्ष शंकरलाल मारू ने जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि:

  • धमकी भरा व्यवहार: जब भी वेतन की बात की जाती है, तो अधिकारी कलेक्टर या एसडीएम का डर दिखाकर हटाने की धमकी देते हैं।
  • संवेदनहीनता: अधिकारियों को सिर्फ काम के आंकड़ों से मतलब है, कार्यकर्ताओं के घर की माली हालत से नहीं।
  • लापरवाही: पेमेंट के संबंध में न तो कोई सही जानकारी दी जाती है और न ही जिम्मेदार अधिकारी फोन उठाते हैं।

ब्लॉक स्तर पर सौपा गया ज्ञापन

​शुक्रवार सुबह से ही जिले के विभिन्न ब्लॉकों में कार्यकर्ताओं का जमावड़ा शुरू हो गया। कहीं मेडिकल ऑफिसर (MO) को तो कहीं बीपीएम (BPM) और बीसीएम (BCM) को ज्ञापन सौंपकर आधिकारिक रूप से काम बंद करने की सूचना दी गई।

क्या होगा असर?

​इस हड़ताल से ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण, प्रसव संबंधी सेवाएं और स्वास्थ्य सर्वे जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा; जब तक बैंक खातों में पैसा नहीं पहुंचता, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगी।

​धार की जनता और स्वास्थ्य विभाग के लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘इमरजेंसी’ से निपटने के लिए क्या कदम उठाता है।

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