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रात को ASI का आदेश और सुबह ढोल-ताशों और जयकारों के साथ भोजशाला में दाखिल हुआ हिंदू समाज

ASI का 2003 का आदेश निरस्त, अब 365 दिन होगी सतत पूजा

जिला प्रशासन और पुलिस अलर्ट

धार। धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (इन्दौर खंडपीठ) ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने इतिहास का रुख बदल दिया है। हाई कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के तुरंत बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने मध्यरात्रि को नया आधिकारिक आदेश जारी कर सालों पुराने नियमों को पूरी तरह पलट दिया है।

​इस आदेश के जारी होते ही धार में मानो रात से ही दीवाली मननी शुरू हो गई। जिस पल का हिंदू समाज को वर्षों से इंतजार था, वह आखिरकार आ गया और रविवार सुबह भोजशाला में एक ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिला जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है।

23 साल पुराना आदेश निरस्त

​हाई कोर्ट के निर्णय के बाद एएसआई के महानिदेशक द्वारा 7 अप्रैल 2003 को जारी किया गया पुराना आदेश अब पूरी तरह रद्द कर दिया गया है। उस पुराने आदेश के तहत परिसर में हिंदुओं के अधिकार सीमित थे और मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति थी।

​क्या हैं एएसआई के नए दिशा-निर्देश?

​ASI के निदेशक ए.एम. सुब्रमण्यम द्वारा जारी आदेश के मुताबिक अब निम्नलिखित व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है:

  • हिंदुओं को निर्बाध अधिकार: चूंकि यह परिसर मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन संस्कृत शिक्षण केंद्र रहा है, इसलिए हिंदू समुदाय को अपनी प्राचीन परंपरा के अनुसार यहाँ पूजा-अर्चना और अध्ययन के लिए बिना किसी रोक-टोक के प्रवेश का अधिकार होगा।
  • 365 दिन सतत पूजा: अब हिंदू समाज को यहाँ वर्ष के 365 दिन सतत (लगातार) पूजा-अर्चना और अनुष्ठान करने का मार्ग पूरी तरह साफ हो चुका है।
  • स्मारक की सुरक्षा और समय: भोजशाला परिसर पहले की तरह ही ‘प्राचीन संस्मारक अधिनियम 1958’ (AMASR Act) के तहत एक संरक्षित स्मारक बना रहेगा। परिसर में श्रद्धालुओं के प्रवेश का समय और अनुमेय गतिविधियां क्या होंगी, इसका निर्धारण धार जिला प्रशासन के साथ तालमेल बिठाकर अधीक्षण पुरातत्वविद द्वारा तय किया जाएगा।

ढोल-ताशों और जयकारों के साथ सुबह 6 बजे ऐतिहासिक प्रवेश

​शनिवार मध्यरात्रि जैसे ही आदेश की प्रति सामने आई, धार में जश्न और तैयारियों का जो दौर शुरू हुआ, वह आज यानी रविवार सुबह एक भव्य उत्सव में तब्दील हो गया। सुबह सूर्योदय के साथ ही भोजशाला के बाहर का दृश्य देखते ही बन रहा था।

  • भगवा ध्वज और मां वाग्देवी का चित्र: ढोल-ताशों और बैंड-बाजों की थाप पर झूमते-गाते हिंदू समाज और विभिन्न हिंदू संगठनों के लोग सुबह ठीक 6:00 बजे भोजशाला परिसर पहुँच गए। श्रद्धालुओं के सिर पर मां वाग्देवी (सरस्वती) का चित्र था और आँखों में एक अलग ही उल्लास।
  • जयकारों से गूंजा परिसर: लोग हाथों में भगवा ध्वज लिए, ‘जय श्री राम’ और ‘मां वाग्देवी की जय’ के गूंजते जयकारों के बीच परिसर के भीतर दाखिल हुए। देखते ही देखते पूरे परिसर को भगवा झंडों से पाटने की तैयारी शुरू हो गई।

​शुद्धिकरण, हवन कुंड की सजावट और 5 पंडितों की टोली

​भोजशाला परिसर के भीतर कदम-कदम पर उत्सव और धार्मिक अनुष्ठान की तैयारियां साफ देखी जा सकती हैं:

  • हवन कुंड की साज-सज्जा: परिसर में स्थित प्राचीन हवन कुंड को विशेष रूप से सजाने और तैयार करने की प्रक्रिया सुबह से ही प्रारंभ कर दी गई है।
  • 5 विद्वान पंडितों का समूह: भोजशाला के गर्भगृह के सामने इस वक्त पांच विद्वान पंडितों की एक विशेष टीम डेरा डाले हुए है। पंडितों के इस समूह द्वारा गर्भगृह के ठीक सामने विशेष मंडल बनाए गए हैं। पूरी भोजशाला का विधि-विधान से शुद्धिकरण करने के बाद, मंडल पूजा-पाठ की जा रही है, जिसके बाद आगे की मुख्य महापूजा संपन्न होगी।
  • गर्भगृह में विराजीं मां सरस्वती: भोजशाला के मूल गर्भगृह में मां वाग्देवी (सरस्वती) का एक सुंदर प्रतिकृति चित्र (पोर्ट्रेट) स्थापित कर दिया गया है, जिसे फूलों और विशेष सामग्रियों से सजाया जा रहा है।

​प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

​इस ऐतिहासिक आदेश की प्रति मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव, संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव, धार जिला कलेक्टर और धार पुलिस अधीक्षक सहित भोपाल एएसआई के क्षेत्रीय अधिकारियों को भेज दी गई है। प्रशासन को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे हाई कोर्ट के आदेश का अक्षरशः पालन कराएं और सुरक्षा व कानून व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम रखें।

​धार के इतिहास में इस फैसले को एक नए और स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। फिलहाल पूरी भोजशाला को भव्य रूप से सजाने का काम युद्धस्तर पर जारी है और धार का हर नागरिक इस ऐतिहासिक पल का गवाह बन रहा है।

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