धार। जिले ने राष्ट्रीय महत्व के सबसे बड़े अभियान ‘जनगणना’ के पहले चरण में एक नया इतिहास रच दिया है। कलेक्टर राजीव रंजन मीना एवं जिला जनगणना अधिकारी के मार्गदर्शन में ‘मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना’ का फील्ड वर्क समय सीमा से पूरे 12 दिन पहले ही 100% सफलता के साथ निपटा लिया गया है। प्रशासन ने इस महाअभियान को पूरा करने के लिए आगामी 20 तारीख का कड़ा लक्ष्य तय किया था। लेकिन मैदानी अमले के अथक परिश्रम और सटीक रणनीति की बदौलत इसे 19 तारीख को ही पूरी तरह संपन्न कर लिया गया।
कलेक्ट्रेट के बजाय योजना सांख्यिकी कार्यालय से चली ‘कमांड’
इस महाअभियान की सबसे खास बात इसकी प्रशासनिक रणनीति रही। जनगणना कार्य निदेशालय के जिला प्रभारी एचसी पर्वत ने राज्य स्तर से प्रशासनिक समन्वय को मजबूत बनाए रखा। वहीं, इसका कुशल संचालन जिला योजना अधिकारी एवं अतिरिक्त जिला जनगणना अधिकारी के नेतृत्व में सीधे योजना सांख्यिकी कार्यालय से किया गया। रणनीतिक फाइलों और दिशा-निर्देशों का प्रबंधन कलेक्ट्रेट के बजाय सीधे इसी दफ्तर से संभाला गया, जिससे फैसले तुरंत हुए।
आंकड़ों में समझिए जनगणना की ‘महा-सर्जरी’
| प्रशासनिक और तकनीकी ढांचा | कुल संख्या |
| कुल बनाए गए चार्ज (ग्रामीण व नगरीय) | 20 चार्ज (20 सजग अधिकारियों के पास कमान) |
| कुल गणना ब्लॉक (विभाजित क्षेत्र) | 4,064 ब्लॉक |
| मैदान में उतरे प्रगणक (डिजिटल सर्वे हेतु) | 4,064 प्रगणक |
| सघन निगरानी के लिए सुपरवाइजर | 658 सुपरवाइजर |
| तकनीकी मार्गदर्शन के लिए मास्टर ट्रेनर | 04 मास्टर ट्रेनर |
| फील्ड ट्रेनर्स की मजबूत टीम | 88 फील्ड ट्रेनर्स |
तकनीकी ग्लिच को पछाड़ा, ब्लॉकों का हुआ पुनर्गठन
इस ऐतिहासिक सफलता का सफर आसान नहीं था। शुरुआत में एचएलबी निर्माण और प्रगणकों की आईडी तैयार करने जैसी कई तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतें सामने आईं। लेकिन प्रशासनिक सूझबूझ दिखाते हुए ब्लॉकों का पुनर्गठन किया गया और काम की स्पीड दोगुनी कर दी गई।
कर्तव्य के आगे बिसराया खुद का गम: पीथमपुर में पिता का निधन, फिर भी की ड्यूटी
इस महाअभियान में कई ऐसी मार्मिक और प्रेरक कहानियां भी सामने आईं, जिन्होंने पूरी टीम में जोश भर दिया। पीथमपुर में एक कर्मचारी के पिता का निधन हो गया, वहीं कई कर्मचारियों के घरों में शादियों का माहौल था। इसके बावजूद, कर्मचारियों ने अपनी व्यक्तिगत क्षति और खुशियों को किनारे रखकर राष्ट्रीय जिम्मेदारी को सर्वोपरि माना और सबसे पहले जनगणना का काम पूरा किया। ऐसे निष्ठावान कर्मचारियों की कहानियों को मीडिया और समाचार पत्रों के माध्यम से सामने लाया गया, उन्हें पुरस्कृत किया गया, जिससे पूरी टीम का मनोबल आसमान पर पहुंच गया।
व्हाट्सएप ग्रुप, प्रचार रथ और संवाद से बदली ‘वर्क कल्चर’
“इस अभियान की सबसे बड़ी यूएसपी जमीनी अमले की मनोभावना को बदलना रहा। व्हाट्सएप ग्रुपों, प्रचार रथों, पम्फलेट्स और लगातार संवाद के जरिए प्रगणकों, सुपरवाइजरों, कंप्यूटर ऑपरेटरों और तकनीकी सहायकों के भीतर ‘सबसे पहले और सबसे बेहतर काम करने’ का एक सकारात्मक जज्बा पैदा किया गया।”
— अतिरिक्त जिला जनगणना अधिकारी
इसी सामूहिक संकल्प और ‘डिजिटल एप्रोच’ का नतीजा है कि जिले की ऑनलाइन डिजिटल सर्वे रिपोर्ट और डेटा को पूरी गुणवत्ता के साथ, समय से पहले ही मुख्य पोर्टल पर शत-प्रतिशत (100%) अपलोड कर दिया गया है।

