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भोजशाला कोर्ट फैसले के बाद ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ ने CM मोहन यादव के सामने रखीं 5 बड़ी मांगें

धार। धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर माननीय उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) द्वारा हिंदू पक्ष में दिए गए ऐतिहासिक फैसले के बाद अब इसे एक भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के धार प्रवास के दौरान ईमेल और पत्राचार के माध्यम से एक महत्वपूर्ण मांग पत्र सौंपा है।

मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने मुख्यमंत्री के कार्यकाल की सराहना करते हुए भोजशाला के कायाकल्प के लिए 5 सूत्रीय मांगें सामने रखी हैं, जिसमें लंदन से मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने से लेकर भव्य ‘मां सरस्वती लोक’ के निर्माण तक की बड़ी बातें शामिल हैं।

‘डॉ. मोहन यादव के स्वर्णिम काल में मिली बड़ी सफलता’

मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाले इस स्वर्णिम कार्यकाल में ही न्यायालय द्वारा भोजशाला को ‘मां सरस्वती मंदिर’ घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि अब यहां 365 दिन पूजा प्रारंभ हो चुकी है और शुक्रवार को होने वाली नमाज भी बंद हो गई है।

यह ऐतिहासिक सफलता ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री के मार्गदर्शन में मिली है। इस कानूनी लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णु शंकर जैन और हाई कोर्ट के अधिवक्ता विनय जोशी के माध्यम से लड़ा गया था, जिसमें 15 मई 2026 को माननीय हाई कोर्ट ने हिंदू पक्ष में एक विस्तृत और ऐतिहासिक आदेश (WP 10497/2022) पारित किया।

मुख्यमंत्री से की गईं 5 बड़ी मांगें

हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने सरकार से इन पांच मुख्य बिंदुओं पर तुरंत कदम उठाने का निवेदन किया है:

  • 1. लंदन से मां वाग्देवी की वापसी: ब्रिटिश संग्रहालय (लंदन) में रखी मां वाग्देवी (सरस्वती जी) की मूल मूर्ति को भारत वापस लाने के प्रयासों को तेज किया जाए और उसे पूरे सम्मान के साथ पुनः भोजशाला में स्थापित किया जाए।

  • 2. ‘मां सरस्वती लोक’ का निर्माण: उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर धार की भोजशाला में भी ‘मां सरस्वती लोक’ का भव्य निर्माण किया जाए, जिससे यह आस्था का एक बड़ा केंद्र बन सके।

  • 3. विशाल धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर: मालवा और निमाड़ के प्रमुख धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों को जोड़कर एक बड़ा टूरिज्म सर्किट बनाया जाए। इसमें उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, मांडू, धार, अमझेरा और इंदौर को शामिल करने की मांग की गई है।

  • 4. वैदिक संस्कृत विश्वविद्यालय: धार की ऐतिहासिक पहचान एक बड़े शिक्षा केंद्र के रूप में रही है, इसीलिए भोजशाला में शीघ्र ही एक ‘वैदिक संस्कृत विश्वविद्यालय’ की स्थापना की जाए।

  • 5. श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन व्यवस्था: उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) के साथ समन्वय बिठाकर स्पष्ट गाइडलाइंस जारी की जाएं, ताकि देश-विदेश से आने वाले भक्तों और दर्शनार्थियों को भोजशाला में दर्शन करने में कोई परेशानी न हो।

क्या बदलेगी मालवा की तस्वीर

यदि सरकार इन मांगों पर आगे बढ़ती है, तो आने वाले समय में धार और आसपास के इलाके न सिर्फ धार्मिक रूप से बल्कि वैश्विक पर्यटन के नक्शे पर भी मजबूती से उभरेंगे। महाकाल लोक और एकात्म धाम (ओंकारेश्वर) के बाद अब ‘मां सरस्वती लोक’ और यह नया ‘धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर’ मध्य प्रदेश के विकास और संस्कृति में एक नया अध्याय जोड़ सकता है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय इन मांगों पर क्या त्वरित एक्शन लेता है।

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