ट्रैक्टर, डंपर और बाइकों की अंधाधुंध टक्कर, नए कानून (BNS) के बाद भी बेखौफ ड्राइवर
धार। रफ्तार, लापरवाही और ट्रैफिक नियमों को ठेंगा दिखाने की प्रवृत्ति सड़कों पर किस कदर ‘काल’ बनकर दौड़ रही है, इसका खौफनाक मंजर पिछले कुछ दिनों में धार जिले और उसके आसपास के थाना क्षेत्रों में देखने को मिला है। अलग-अलग थाना क्षेत्रों से आई 13 बड़ी सड़क दुर्घटनाओं की एफआईआर (FIR) इस बात की गवाही दे रही हैं कि हमारी सड़कें अब सफर के लिए नहीं, बल्कि जिंदगी दांव पर लगाने के लिए जानी जाने लगी हैं। इन हादसों में जहाँ 2 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, वहीं बच्चों और महिलाओं सहित करीब 15 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। आइए करते हैं इन हादसों का पूरा विश्लेषण कि आखिर कहाँ और कैसे चूकीं जिंदगियाँ।
1. दो हंसते-खेलते परिवारों के बुझे चिराग
सड़क हादसों में सबसे दुखद पहलू मौत का होता है। हालिया मामलों में दो लोगों ने अपनी जान गंवाई है, और दोनों ही मामलों में आरोपी वाहन चालक मौके से फरार होने में कामयाब रहे।
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नालछा में ट्रैक्टर ने बाइक को पीछे से रौंदा: थाना नालछा के अंतर्गत ग्राम बगड़ी में एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर (MP11ZH3101) के अज्ञात चालक ने लापरवाही की सारी हदें पार करते हुए आगे जा रहे मोटरसाइकिल सवार 30 वर्षीय धारासिंह भील को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि धारासिंह ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
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पीथमपुर हाईवे पर दर्दनाक अंत: पीथमपुर के सेक्टर 01 अंतर्गत महू-नीमच हाईवे पर एक अज्ञात वाहन ने 44 वर्षीय अंतिम साहू (निवासी किशनगंज, इंदौर) को जोरदार टक्कर मार दी। घायल अंतिम को इंदौर के ट्रामा सेंटर ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। मर्ग जांच के बाद पुलिस ने अब मामला दर्ज किया है।
2. गश्त कर रहे ग्रामीणों को ‘इक्को’ ने रौंदा, 5 घायल
सबसे चौंकाने वाली और दिल दहला देने वाली घटना थाना कुक्षी के सुसारी ग्राम से सामने आई। यहाँ सुबह करीब 4:30 बजे गांव की सुरक्षा के लिए गश्त (पेट्रोलिंग) कर रहे ग्रामीण जब ड्यूटी खत्म कर घर जाने के लिए राजू कॉलोनी के पास खड़े थे, तभी बड़वानी की तरफ से आ रही एक अज्ञात ईको (Ecco) कार ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में गांव की सुरक्षा में तैनात योगेश (17), संतोष (31), सचिन (33), विजय (26) और सचिन बागेश्वर (27) गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी के सिर, हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं।
3. दोपहिया वाहनों के लिए काल बनीं तेज रफ्तार गाड़ियां
ज्यादातर हादसों में यह देखा गया कि विपरीत दिशा से आ रहे वाहनों ने लापरवाही पूर्वक ड्राइव करते हुए सामने से टक्कर मारी।
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कुक्षी (ग्राम ढोल्या): यहाँ एक आयसर ट्रक (MP09GH5839) ने सामने से आ रही बाइक को टक्कर मारी, जिससे लीलाबाई और उनकी दो मासूम बेटियां स्नेहा और आशिता गंभीर रूप से घायल हो गईं।
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अमझेरा (चालनी रोड): एक अज्ञात बाइक चालक (MP11MU6164) ने देवसिंह हटिला की बाइक को सामने से टक्कर मार दी। इस हादसे में देवसिंह, उनकी बेटी चंदाबाई और बेटा मिथलेश गंभीर रूप से घायल हुए।
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राजगढ़ में बैक-टू-बैक तीन हादसे: राजगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत तीन अलग-अलग वारदातें हुईं। ग्राम माछलिया में संजू दायमा नाम के बाइक चालक ने सुखराम की बाइक को टक्कर मारी। वहीं तिरला ग्राम की पुलिया के पास दो अलग-अलग हादसों में एक अज्ञात बाइक और एक बिना नंबर की सफेद अपाचे ने क्रमश: राकेश सिंगार और खिमसिंह के परिवार (पत्नी मांता बाई और बेटे हरि) को सामने से टक्कर मारकर लहूलुहान कर दिया।
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कानवन और टांडा में भी वही कहानी: कानवन के रलायता रोड पर बाइक (MP11NG3034) के चालक ने संतोष खराड़ी और अर्जुन खराड़ी को घायल कर दिया। उधर टांडा के बिल्दा रोड पर एक अज्ञात ऑल्टो कार (MP11CC4623) ने अपाचे सवार सिकदार को सामने से उड़ा दिया, जिससे सिकदार के सिर और पेट में गंभीर चोटें आई हैं।
4. सागौर और धामनोद में भारी वाहनों की लापरवाही
सिर्फ दोपहिया ही नहीं, बल्कि भारी वाहन चालकों की लापरवाही भी कम नहीं है।
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धामनोद में बस की लापरवाही से टायर के नीचे आया यात्री: मुंबई से आ रही राजरतन ट्रेवल्स की बस (MP09ZU9990) के ड्राइवर ने फूडो होटल पर रुकने के बाद बड़ी लापरवाही की। यात्री बिरजू शर्मा (49 वर्ष) अभी बस में चढ़ ही रहे थे कि ड्राइवर ने अचानक बस आगे बढ़ा दी। बिरजू नीचे गिरे और बस का पिछला टायर उनके बाएं पैर को कुचलता हुआ निकल गया।
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सागौर में ट्रक ने मारी रिवर्स टक्कर: सागौर के उदली बालाजी चौराहे पर एक ट्रक (DD01V9941) के चालक ने बिना देखे तेजी से गाड़ी रिवर्स कर दी और पीछे खड़ी अजयसिंह डोडिया की कार को साइड से बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ।
आखिर गलतियाँ कहाँ हो रही हैं
इन सभी 13 खबरों का बारीकी से अध्ययन करने पर कुछ बेहद गंभीर पैटर्न सामने आते हैं :
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मर्ग जांच और विलंब से कायमी : कई मामलों में दुर्घटना के कई दिनों बाद पुलिस केस दर्ज हुआ है। उदाहरण के लिए, पीथमपुर में हादसा 1 मई को हुआ और कायमी 27 मई को हुई। नालछा में हादसा 22 मई को हुआ और केस 27 मई को दर्ज हुआ। पुलिस का कहना है कि मर्ग जांच और फरियादी के इलाज के कारण देरी हुई, लेकिन देरी से अज्ञात वाहनों को ढूंढना और मुश्किल हो जाता है।
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हाईवे और ग्रामीण सड़कों पर कोई गति नियंत्रण नहीं : तिरला ग्रिड पुलिया, सिमलावदा फाटा, और महू-नीमच हाईवे जैसे स्पॉट्स ‘ब्लैक स्पॉट’ बनते जा रहे हैं, जहाँ मोड़ों या पुलिया के पास वाहनों की गति धीमी करने के लिए कोई संकेतक या स्पीड ब्रेकर नहीं हैं।
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नए कानून (BNS) के तहत मामले दर्ज : इन सभी मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281 (रैश ड्राइविंग) और 125(ए) (जान जोखिम में डालना/गंभीर चोट पहुंचाना) तथा 106(1) (लापरवाही से मौत) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। नए कानून में सजा के कड़े प्रावधान हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ड्राइवरों में इसका खौफ नजर नहीं आ रहा।
जनसमाचार एमपी की अपील : सड़कें आपके स्वागत के लिए हैं, श्मशान के सफर के लिए नहीं। कृपया हेलमेट पहनें, वाहनों की गति सीमा में रखें और रात या सुबह के समय हाईवे पर अतिरिक्त सावधानी बरतें। आपकी एक लापरवाही किसी हँसते-खेलते परिवार को ताउम्र का दर्द दे सकती है।
