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जीत का क्रेडिट लेने वाले नेता तब कहाँ थे, जब भोजशाला में नमाज़ होती थी-खट्टर

अब देश भर के कब्जे वाले मंदिर मुक्त कराने का समय आ गया है-स्वाती काशिद

लंदन से मां वाग्देवी को वापस लाने की उठी मांग

धार। भोजशाला के ऐतिहासिक कानूनी फैसले के बाद पहली बार धार पहुंची सनातन जगत की प्रमुख हस्तियों ने माता वाग्देवी के दरबार में हाजिरी लगाई। सनातन महासंघ के संस्थापक (देहरादून निवासी) गौतम खट्टर एवं अखिल भारतीय महिला मराठा महासंघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष व इंदौर उच्च न्यायालय की अधिवक्ता स्वाती काशिद ने शुक्रवार को भोजशाला परिसर का दौरा किया।

न्यायालय के फैसले के बाद भोजशाला के बदले हुए स्वरूप को देखकर दोनों ही दिग्गज भावुक हो उठे। उन्होंने वहां मौजूद हिंदू समाज और मीडिया को संबोधित करते हुए नेताओं के ‘क्रेडिट गेम’ पर तीखा प्रहार किया और संघर्ष करने वाले जमीनी सनातनी योद्धाओं की पीठ थपथपाई।

मुश्किल वक्त में गायब थे नेता

भोजशाला परिसर में मां वाग्देवी की अखंड ज्योति और सरस्वती कूप के दर्शन करने के बाद सनातन महासंघ के संस्थापक गौतम खट्टर ने नेताओं की अवसरवादिता पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “मैं पिछली बार भी यहां आया था, लेकिन इस बार मुझे तीन बड़े बदलाव दिखे हैं। पहले यहां हर शुक्रवार को नमाज होती थी, लेकिन अब सिर्फ मां की भक्ति, महाआरती, पूजन और दिनभर सनातनियों के दर्शन होते हैं। यह एक युगांतरकारी परिवर्तन है।”

गौतम खट्टर ने मीडिया के माध्यम से सामने आ रहे राजनीतिक वर्चस्व पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब मुस्लिम समाज इसे मस्जिद का रूप दे रहा था, तब कोई नेता अपना रुतबा दिखाने नहीं आया। सबको अपने करियर और नुकसान का डर था। आज जब समाज के पुरुषार्थ से जीत मिली है, तो नेता क्रेडिट लेने आ गए हैं।

खट्टर ने नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा:

  • मूल स्वरूप बहाल करें: “यदि नेताओं में इतना ही सामर्थ्य और आत्मविश्वास है, तो भोजशाला के ठीक बाहर गुंबद के रूप में खड़े हनुमान जी और शिव जी के पूर्ण परिवार मंदिर को राजा भोज के समय के मूल स्वरूप में वापस लाकर दिखाएं।”

  • विजय मंदिर को मुक्त कराएं: “राजा भोज द्वारा निर्मित विजय मंदिर में आज भी नमाज हो रही है, हाल ही में बकरा ईद पर भी हुई। नेता वहां अपनी ताकत दिखाएं।”

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि इंदौर उच्च न्यायालय के आदेशानुसार लंदन के म्यूजियम में ‘कैद’ मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को शीघ्र अति शीघ्र धार लाकर भोजशाला में ससम्मान विराजित किया जाए।

सिर्फ इतिहास नहीं, सदियों की वेदना देखी

इंदौर महानगर नगर मंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता स्वाती काशिद दीदी ने इस क्षण को सनातन अस्मिता का जीवंत अनुभव बताया। भोजशाला के पत्थरों को देखकर भावुक हुईं स्वाती काशिद ने कहा कि “आज धार की इस पवित्र धरती पर केवल इतिहास नहीं दिखा, बल्कि सदियों का संघर्ष, तप और वेदना महसूस हुई। यह विजय केवल एक अदालती फैसला नहीं, बल्कि सत्य और सनातन संस्कृति की पुनर्प्रतिष्ठा है।”

‘साक्ष्य खोजो अभियान’ का आह्वान

स्वाती काशिद ने समस्त हिंदू समाज से एक बड़ी अपील करते हुए कहा कि हम कब तक अपने ही मंदिरों के लिए न्यायालयों के चक्कर काटते रहेंगे? अब समय आ गया है कि सनातनी समाज एकजुट होकर एक ऐसी व्यवस्था बनाए, जिसके तहत देश में जहां-जहां भी हमारे प्राचीन मंदिरों के प्रमाण हैं, वहां अपने आराध्य के साक्ष्य खुद सामने रखें और कब्जेधारियों से अपने देवालयों को मुक्त कराएं।

भोजशाला मुक्ति यज्ञ के नायकों को नमन

इस अवसर पर अतिथियों ने भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा और उनके साथ वर्षों तक लाठियां-मुकदमे झेलने वाले प्रत्येक सनातनी कार्यकर्ता का कोटिशः नमन किया। संयोजक गोपाल शर्मा ने अतिथियों को संपूर्ण भोजशाला परिसर का भ्रमण कराया, इतिहास की बारीकियों से अवगत कराया और मां वाग्देवी ज्योति मंदिर में जल रही अखंड ज्योति के दर्शन करवाए। समिति द्वारा आए हुए विशिष्ट अतिथियों का ‘भगवा उपरणा’ (दुपट्टा) ओढ़ाकर भव्य स्वागत किया गया।

इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए भोजशाला उत्सव समिति के महाप्रबंधक हेमंत दोराया, महामंत्री सुमित चौधरी, श्रीश दुबे, अनुजा पंडित, अजय मस्तूद सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति और श्रद्धालु उपस्थित रहे। जानकारी भोजशाला समिति के मीडिया प्रमुख मोहन राठौर ने दी।

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