मोबाइल चोरी कर खाते से उड़ाए 2 लाख रुपये, सायबर सेल की ‘e-Zero FIR’ से खुला राज
UP के युवक के साथ MP में बड़ा ‘खेल’
धार। डिजिटल इंडिया के इस दौर में शातिर अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका एक हैरान करने वाला मामला मध्य प्रदेश के नौगाँव थाना क्षेत्र से सामने आया है। यहाँ एक अज्ञात बदमाश ने उत्तर प्रदेश के एक युवक का न सिर्फ मोबाइल पार किया, बल्कि चंद घंटों के भीतर उसके बैंक खाते को भी पूरी तरह से ‘साफ’ कर दिया। पीड़ित के खाते से ₹2,01,860 (दो लाख एक हजार आठ सौ साठ रुपये) की बड़ी रकम पार कर दी गई है।
पेट्रोल पंप के पास हुआ ‘कांड’
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, फरियादी लल्लन (पिता रामशंकर वर्मा), जो कि ग्राम असेहरु (पोस्ट पुरवा, जिला उन्नाव, उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं, 15 मार्च 2026 की शाम को नौगाँव क्षेत्र में थे। शाम करीब 5:00 से 7:00 बजे के बीच, ग्राम उटावद स्थित एचपी पेट्रोल पंप के पास किसी अज्ञात शातिर चोर ने नजर चूकाकर लल्लन का मोबाइल फोन चोरी कर लिया। लल्लन जब तक कुछ समझ पाते, तब तक चोर मोबाइल के साथ-साथ उनके बैंक खाते तक भी पहुँच चुका था।
मोबाइल हाथ लगते ही खाली कर दिया बैंक अकाउंट
बदमाश ने मोबाइल चोरी करने के बाद फरियादी के बैंक खाता क्रमांक 002616310000344 में सेंध लगाई। मोबाइल में मौजूद बैंकिंग ऐप्स या ओटीपी का फायदा उठाकर आरोपी ने खाते से कुल 2,01,860 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर लिए। पीड़ित को जब तक इस ऑनलाइन फ्रॉड की भनक लगी, तब तक उसकी गाढ़ी कमाई पर डाका डाला जा चुका था।
2 महीने बाद क्यों दर्ज हुई FIR
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि घटना 15 मार्च की है, लेकिन इसकी एफआईआर (FIR) करीब ढाई महीने बाद 29 मई 2026 को दर्ज की गई।
विलंब का कारण भी बेहद दिलचस्प और तकनीकी है:
घटना के बाद पीड़ित ने इसकी शिकायत तुरंत ऑनलाइन माध्यम से सायबर सेल में दर्ज कराई थी। सायबर सेल ने इस पर ‘e-Zero FIR’ (ई-जीरो एफआईआर) कायम की। इसके बाद जब यह e-Zero FIR संबंधित नौगाँव थाने को ट्रांसफर की गई, तब पुलिस ने फरियादी लल्लन के बयानों और ब्यौरे के आधार पर 29 मई की शाम 19:34 बजे धारा 303(3) BNS (भारतीय न्याय संहिता) के तहत मामला दर्ज किया।
जांच में जुटी पुलिस
नौगाँव पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मोबाइल और रकम चोरी का मामला दर्ज कर लिया है। अब पुलिस सायबर सेल की मदद से उस बैंक खाते और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री को खंगाल रही है, जिसमें यह रकम ट्रांसफर की गई है। पुलिस का दावा है कि मोबाइल के आईएमईआई नंबर और डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए आरोपी जल्द ही सलाखों के पीछे होगा।
