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घरों और मठ-मंदिरों में रखीं 10 लाख से ज्यादा प्राचीन पांडुलिपियों का होगा डिजिटलाइजेशन

मध्यप्रदेश में ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ की बड़ी पहल

भोपाल। मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को सहेजने के लिए मोहन सरकार ने एक बेहद अनूठी और बड़ी मुहिम शुरू की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर्स वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के मठ-मंदिरों, आश्रमों, पुस्तकालयों और घरों में सहेजकर रखी गईं प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटल संरक्षण किया जाए।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि हमारी सांस्कृतिक स्मृतियां, ज्ञान, विज्ञान, परंपराएं और दर्शन इन पांडुलिपियों में ही सुरक्षित हैं, जिन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

क्या है ‘ज्ञान भारतम् मिशन’

इस अमूल्य धरोहर को बचाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ की शुरुआत की गई है। इसके तहत 1950 से पहले की सभी पांडुलिपियों का डिजिटल रूप से संरक्षण किया जा रहा है। सिर्फ सरकारी संस्थान ही नहीं, बल्कि व्यापारिक प्रतिष्ठानों, घरों, आश्रमों और मंदिरों में मौजूद ऐतिहासिक दस्तावेजों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। ताड़पत्र, ताम्रपत्र, प्रस्तर (पत्थर), भोजपत्र और प्राचीन पोथियों के रूप में उपलब्ध ज्ञान को हमेशा के लिए डिजिटल फॉर्मेट में सुरक्षित किया जाएगा।

मध्य प्रदेश में हैं 10 लाख से ज्यादा पांडुलिपियां

मुख्यमंत्री निवास के ‘समत्व भवन’ में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में बेहद चौंकाने वाले और गौरवशाली आंकड़े सामने आए। बैठक में बताया गया कि एमपी के जिलों में उपलब्ध पांडुलिपियों की अनुमानित संख्या करीब 10 लाख 24 हजार 571 है। इतने बड़े खजाने को सहेजने के लिए हर जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया गया है। साथ ही, भारत सरकार और प्रदेश के पुरातत्व विभाग ने हर जिले के लिए एक-एक प्रतिनिधि भी नियुक्त किया है।

मोबाइल ऐप से होगा सर्वे

इस महाअभियान को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। जिला समितियां ‘ज्ञान भारतम्’ मोबाइल ऐप के जरिए इन पांडुलिपियों का सर्वे कर रही हैं और उन्हें ऐप पर अपलोड किया जा रहा है।

आम जनता और शोधार्थियों को जोड़ें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर्स को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस अभियान को एक जन-आंदोलन बनाया जाए। जिन परिवारों या संस्थानों के पास प्राचीन पांडुलिपियां हैं, जिला प्रशासन उनसे सीधा संवाद स्थापित करे। इस मुहिम में शैक्षणिक संस्थानों, कॉलेजों और शोधार्थियों को विशेष रूप से शामिल किया जाए।

इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिव शेखर शुक्ला सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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