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मप्र में खुलेगा ‘सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर’, सिंहस्थ-2028 के लिए बनेंगे 3000 सायबर वॉरियर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क कार्यशाला की शुरुआत, राज्य में तैनात होंगे ‘सायबर कमांडो’

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में “राज्य डेटा के लिए सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने” पर केंद्रित एक दिवसीय कार्यशाला का दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। भारत सरकार के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य शासन के विभिन्न विभागों में सायबर सुरक्षा की वर्तमान चुनौतियों, उभरते खतरों, डेटा संरक्षण की आवश्यकताओं और डिजिटल शासन प्रणालियों की सुरक्षा पर व्यापक विचार-विमर्श करना था। इस सत्र में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेन्द्रन और एमपीएसईडीसी के प्रबंध संचालक आशीष वशिष्ठ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी (सीआईएसओ) शामिल हुए।

कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य में सायबर अपराधों पर लगाम लगाने और डेटा सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (MCTE) और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से एक अत्याधुनिक ‘सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर’ स्थापित करने की बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में डेटा सबसे मूल्यवान संपत्ति है और इसकी सुरक्षा राष्ट्र की सीमा जितनी ही महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने आगाह किया कि सायबर क्राइम और डेटा सेफ्टी में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है, यदि डेटा ब्रीच के कारण नागरिकों की गाढ़ी कमाई का नुकसान होता है, तो उसकी आर्थिक भरपाई की जिम्मेदारी भी सरकार की होगी।

44 सायबर कमांडो तैयार करेंगे सिंहस्थ के पहले

मध्यप्रदेश में वर्तमान में 1700 से अधिक शासकीय सेवाएं नागरिकों को डिजिटल माध्यम से मिल रही हैं। ऐसे में वित्तीय, भूमि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए ‘एमपी-सीईआरटी’ (MP-CERT), स्टेट डेटा सेंटर और सुरक्षित ‘स्वान’ (SWAN) नेटवर्क को और मजबूत किया जा रहा है। एडीजी ए. साई मनोहर ने तकनीकी क्षमता विस्तार की जानकारी देते हुए बताया कि सिंहस्थ-2028 से पहले राज्य सायबर सेल में कुल 44 सायबर कमांडो तैयार कर लिए जाएंगे (जिनमें से 6 वर्तमान में कार्यरत हैं और 38 का चयन हो चुका है)। इसके साथ ही सिंहस्थ के दौरान सायबर हमलों पर नजर रखने के लिए लगभग 3 हजार इंजीनियरिंग छात्रों और युवाओं को ‘सायबर वॉरियर’ के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम, सुरक्षित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, ज़ीरो-ट्रस्ट मॉडल और डेटा वर्गीकरण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियाँ दीं। पाँच समानांतर समूहों में बंटे अधिकारियों ने विभागीय समन्वय बढ़ाने, जोखिम प्रबंधन और लेगेसी (पुरानी) प्रणालियों के आधुनिकीकरण पर अपनी अनुशंसाएँ प्रस्तुत कीं।

भविष्य पर प्रभाव

इस कार्यशाला में विशेषज्ञों और अधिकारियों द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर मध्य प्रदेश सरकार राज्य के लिए एक मजबूत, सुरक्षित और भविष्य-उन्मुख (भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सक्षम) सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क विकसित करेगी। आने वाले समय में बनने वाला रिसर्च सेंटर न केवल सायबर अटैक की समय से पहले पहचान (पूर्वानुमान आधारित निरंतर सतर्कता) करने में मदद करेगा, बल्कि यह अनुसंधान, नवाचार और युवाओं के कौशल विकास का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा, जिससे नागरिकों का डिजिटल गवर्नेंस पर भरोसा और मजबूत होगा।

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