धार। सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां करने और अपनी मौत की वजह का वीडियो इंस्टाग्राम पर अपलोड करने के बाद एक विवाहिता ने मौत को गले लगा लिया। मृतिका ने जहर खाने से पहले एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, जो अब इस पूरे मामले में न्याय की अहम कड़ी बन गया है। इस हिला देने वाली घटना में पुलिस ने मर्ग जांच और कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए गए मरणासन्न कथन के आधार पर मृतिका के पति, उसकी दूसरी पत्नी, सास और ननद के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है।
यह पूरी घटना जिले के सादलपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पिंजराया की है। यहाँ 3 जून 2026 को सुबह करीब 11:00 बजे मृतिका आशाबाई (पति कृष्णा चौहान) ने अपने पिता के घर पर गेहूं में रखने वाली जहरीली दवाई खा ली थी। गंभीर हालत में इलाज के दौरान अगले ही दिन 4 जून 2026 को आशाबाई की मृत्यु हो गई। मामले में लंबी मर्ग जांच और अभियोजन अधिकारी से कानूनी राय (लीगल ओपिनियन) लेने के बाद, सादलपुर थाना पुलिस ने 25 जून गुरुवार की रात 9:10 बजे मृतिका के पति कृष्णा चौहान, उसकी दूसरी कथित पत्नी सज्जाबाई, सास रेखाबाई और ननद कौशल्याबाई के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण) के तहत अपराध क्रमांक 155/2026 दर्ज किया है। सादलपुर पुलिस के अनुसार चारों आरोपी अभी फरार है।
पुलिस जांच और घटना के विवरण के अनुसार, मृतिका आशाबाई का पति कृष्णा चौहान, सज्जाबाई नामक महिला को अपनी दूसरी पत्नी बनाकर साथ रख रहा था। इसी बात को लेकर मृतिका की सास रेखाबाई और ननद कौशल्याबाई उसे लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थीं। इसी प्रताड़ना से तंग आकर आशाबाई ने अपने मायके में घातक कदम उठाया। जहर खाने से पहले उसने अपने मोबाइल से एक वीडियो बनाया और उसे इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया। जब अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था, तब धार के कार्यपालिक मजिस्ट्रेट पंकज यादव ने उसके मरणासन्न कथन दर्ज किए थे, जिसमें आशाबाई ने अपने पति के अवैध संबंधों और ससुराल पक्ष की मारपीट व प्रताड़ना को अपनी इस स्थिति का जिम्मेदार ठहराया था।
घटना के बाद सादलपुर पुलिस ने मर्ग क्रमांक 19/2026 (धारा 194 बीएनएसएस) दर्ज कर जांच शुरू की थी। मृतिका के परिजनों के बयान और मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयानों के मिलान के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा है। इस मामले में पुलिस अब आरोपियों की गिरफ्तारी और सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो को साक्ष्य के रूप में शामिल कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की तैयारी कर रही है। कानूनविदों के अनुसार, मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज मरणासन्न कथन और सोशल मीडिया पर अपलोड वीडियो कोर्ट में आरोपियों को सजा दिलाने में सबसे मजबूत सबूत साबित होंगे।
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