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विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में धार के ओम रावत का राष्ट्रीय स्तर पर चयन

ओम रावत ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों का करेंगे दौरा

धार। धार जिले के होनहार युवा ओम रावत ने राष्ट्रीय स्तर पर जिले का गौरव बढ़ाया है। केंद्र सरकार द्वारा देश के सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों को मजबूत करने और युवाओं में राष्ट्र निर्माण का जज्बा भरने के लिए शुरू किए गए ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2026’ के दूसरे चरण के लिए ओम रावत का चयन किया गया है। वे अब देश की सीमाओं पर जाकर जमीनी स्तर के विकास और स्थानीय संस्कृति को करीब से देखेंगे।

​केंद्रीय गृह मंत्रालय और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के ‘माई भारत’ पोर्टल के सहयोग से इस राष्ट्रव्यापी चयन प्रक्रिया को पूरा किया गया। इस चयन के लिए ‘माई भारत’ प्लेटफॉर्म पर एक ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई थी, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर पूरे मध्य प्रदेश से कुल 10 युवाओं को शॉर्टलिस्ट (चयनित) किया गया। जिला युवा अधिकारी के अनुसार, इन चुनिंदा 10 युवाओं में धार जिले से अकेले ओम रावत ने अपनी जगह बनाई है, जो इस सात दिवसीय (एक सप्ताह) विशेष कार्यक्रम में जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

​इस कार्यक्रम के दूसरे चरण में उत्तर और पूर्वोत्तर के उन राज्यों को शामिल किया गया है, जिनकी सीमाएं चीन, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और म्याँमार से लगती हैं। इसके तहत ओम रावत को अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नगालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में जाने का मौका मिलेगा। इस दौरे में वे सड़कों, टेलीविज़न, टेलीकॉम कनेक्टिविटी और 24×7 बिजली आपूर्ति जैसे बुनियादी ढांचे के लक्ष्यों से जुड़े 100 से अधिक चयनित गांवों का दौरा करेंगे। वहां ये युवा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर विभिन्न जमीनी गतिविधियों का नेतृत्व करेंगे।

​इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम का दूरगामी प्रभाव सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और वहां से होने वाले पलायन को रोकने में मददगार साबित होगा। कार्यक्रम के दौरान ओम रावत जैसे युवा स्वयंसेवक शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण जागरूकता, बुनियादी ढांचे के विकास और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सीमावर्ती समुदायों के साथ सीधे मिलकर काम करेंगे। सरकार का मुख्य उद्देश्य युवाओं को जमीनी स्तर के विकास से जोड़ना है, ताकि सीमावर्ती गांवों से हो रहे पलायन को रोकने के प्रयासों को गति मिल सके और युवाओं में देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना और मजबूत हो।

 

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