धार वन मंडल का ‘डिजिटल प्रहार’
धार। सरकारी दफ्तरों में अब फाइलों का अंबार और ड्राफ्टिंग की सुस्ती बीते जमाने की बात होने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘AI आधारित सुशासन’ के विजन को धार वन मंडल ने हकीकत में बदल दिया है। प्रदेश में पहली बार वन विभाग ने “AI Fluency & Efficiency Enhancement Program” चलाकर अपने कर्मचारियों को ‘स्मार्ट’ बना दिया है।
1. अब ‘रोबोटिक रफ्तार’ से होगा काम: 4 दिन में सीखीं आधुनिक तकनीकें
कलेक्टर राजीव रंजन मीना और डीएफओ (DFO) विजयानंथम टी.आर. के नेतृत्व में हुए इस 4 दिवसीय शिविर में 40 कर्मचारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों को AI का मास्टर बनाया गया।
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क्या सीखा: ChatGPT और Google Gemini से पत्राचार (Drafting) करना।
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भाषा की दीवार खत्म: भारत सरकार के ‘भाषिणी’ ऐप से अनुवाद और संवाद।
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स्मार्ट वर्किंग: Google Workspace AI और Gamma जैसे टूल्स से मिनटों में प्रेजेंटेशन और रिपोर्ट तैयार करना।

2. समय की महाबचत: फाइलें नहीं, अब जनसेवा दौड़ेगी
प्रशिक्षण का सबसे चौंकाने वाला पहलू ‘टाइम मैनेजमेंट’ है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार:
सालाना 8800 मानव-घंटों की बचत: जो काम पहले घंटों में होता था, अब वह मिनटों में होगा। विभाग का मानना है कि इस बचे हुए समय का उपयोग अधिकारी जनता की समस्याओं को सुलझाने और फील्ड वर्क में कर सकेंगे।
3. डेटा का खेल: एक्सेल में ऑटोमेशन और लाइव प्रैक्टिकल
प्रशिक्षण केवल किताबी नहीं था। कर्मचारियों से लाइव प्रैक्टिकल कराया गया, जिसमें:
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जटिल डेटा का विश्लेषण (Data Analysis) करना।
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एक्सेल में ऑटोमेशन के जरिए बड़ी गणनाएं चुटकियों में करना।
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मीटिंग्स के मिनट्स और फाइल नोटिंग को त्रुटिरहित (Error-free) बनाना।
“उत्पादकता बढ़ेगी, लेकिन नैतिकता का रखें ध्यान”
समापन पर डीएफओ विजयानंथम टी.आर. ने कर्मचारियों को जीत का मंत्र दिया। उन्होंने कहा—
“AI में काम की उत्पादकता बढ़ाने की अपार क्षमता है, लेकिन इसका उपयोग पूरी तरह नैतिक, सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से होना चाहिए। यह तकनीक कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाएगी, जिससे विभागीय लक्ष्यों को पाना आसान होगा।”
जनसमाचार एमपी विशेष: सुशासन का ‘नया माइलस्टोन’
मध्यप्रदेश के वन विभाग में यह अपनी तरह का पहला और अभिनव प्रयोग है। धार जिले से शुरू हुई यह डिजिटल क्रांति जल्द ही पूरे प्रदेश के अन्य विभागों के लिए रोल मॉडल बन सकती है। अब सरकारी बाबू पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि ‘AI की स्पीड’ से काम करेंगे।
