Headlines

झाड़ियों में दुबकी मिली ‘मादा शावक’ : रातभर मां का इंतजार किया, नहीं आई तो वन विभाग ने भेजा भोपाल

धार। वन परिक्षेत्र धामनोद के अंतर्गत उप परिक्षेत्र उमरबन की बीट सांवलाखेडी के ग्राम बेंचकुंआ में उस समय हड़कंप मच गया, जब नदी किनारे झाड़ियों में ग्रामीणों ने एक वन्यजीव तेंदुआ शावक (शावक) को देखा। गांव में तेंदुए के बच्चे की खबर आग की तरह फैल गई और मौके पर ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। ग्रामीणों की सजगता से फौरन इसकी सूचना वन विभाग को दी गई।

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने बिना वक्त गंवाए त्वरित कार्रवाई की और शावक को सुरक्षित अपनी सुपुर्दगी में ले लिया। यह पूरी मुस्तैद कार्रवाई वन मंडल अधिकारी विजयानंथम टी.आर. के कुशल मार्गदर्शन में वन परिक्षेत्र अधिकारी धामनोद एवं वन स्टाफ द्वारा मौके पर पहुंचकर की गई।

रातभर मां का इंतजार, पर नहीं लौटी ‘मादा तेंदुआ’

वन विभाग की टीम ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पहली प्राथमिकता शावक को उसकी मां से मिलाने को दी। इसके लिए अमले ने रातभर घटना स्थल के आसपास पिंजरा और शावक को रखकर कड़ी निगरानी रखी। वनकर्मी इस उम्मीद में रातभर जागे कि मादा तेंदुआ अपने बच्चे को लेने आएगी, लेकिन काफी प्रयासों और घंटों के इंतजार के बाद भी मादा तेंदुआ वहां नहीं पहुंची।

शावक ‘मादा’ है और बेहद कमजोर

फील्ड में सफलता न मिलने के बाद रविवार को शावक को सुरक्षित वन परिक्षेत्र कार्यालय धामनोद लाया गया। यहाँ पशु चिकित्सक अधिकारी की मौजूदगी में उसका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। डॉक्टरों की जांच में सामने आया कि यह तेंदुआ शावक ‘मादा’ है और भूख-प्यास या किसी अन्य कारण से अत्यधिक कमजोरी की स्थिति में है।

डॉक्टरों की सलाह: 24 घंटे निगरानी की जरूरत : पशुचिकित्सक अधिकारी ने लिखित सुझाव दिया कि शावक की जान बचाने और उसके बेहतर स्वास्थ्य के लिए उसे किसी विशेष वन्यजीव चिकित्सक की सतत निगरानी में रखना बेहद जरूरी है। साधारण सेटअप में उसकी जान को खतरा हो सकता था।

मिशन भोपाल: वन विहार में विशेषज्ञों की टीम तैनात

चूंकि शावक की हालत नाजुक थी, इसलिए वरिष्ठ अधिकारियों ने तुरंत बड़ा फैसला लिया। चिकित्सकीय सलाह के आधार पर मादा तेंदुआ शावक को तत्काल वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल के लिए रवाना कर दिया गया। भोपाल पहुंचते ही वन्यजीव विशेषज्ञों और डॉक्टरों की स्पेशल टीम ने उसे अपनी देखरेख में ले लिया है, जहाँ उसकी चौबीसों घंटे मॉनिटरिंग और इलाज जारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *