129 फरियादियों की सुनी दर्दभरी दास्तां, लापरवाह अफसरों को फोन पर लगाई फटकार
इंदौर। इंदौर पुलिस कमिश्नरेट में अब आम जनता का भरोसा दिनों-दिन मजबूत होता जा रहा है। मध्य प्रदेश शासन के निर्देशों का पालन करते हुए आज मंगलवार (26 मई) को आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में पीड़ितों की भारी भीड़ उमड़ी। पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने खुद कमान संभालते हुए कार्यालय के सभागार में एक-एक पीड़ित की व्यथा को बेहद संवेदनशीलता से सुना। कमिश्नर ने न सिर्फ आवेदन लिए, बल्कि कई मामलों में लापरवाही बरतने वाले मैदानी अधिकारियों को फोन लगाकर मौके पर ही त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए।
इन 3 बड़े मुद्दों पर केंद्रित रहीं शिकायतें
1. ऑनलाइन ठगी और वित्तीय अपराध का बढ़ा ग्राफ
जनसुनवाई में ऑनलाइन फाइनेंशियल फ्रॉड और पैसों के लेन-देन में धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए। इस पर कमिश्नर ने साइबर सेल और संबंधित थानों को तत्काल तकनीकी जांच शुरू करने और जालसाजों को दबोचने के आदेश दिए।
2. भू-माफियाओं के शिकार: प्लॉट और मकान संबंधी धोखाधड़ी
जमीन, प्लॉट और मकान हड़पने तथा प्रॉपर्टी के नाम पर ठगी के शिकार हुए लोग बड़ी उम्मीद लेकर पहुंचे। पुलिस कमिश्नर ने सीनियर अफसरों को जमीन से जुड़े इन विवादों में तुरंत मौका मुआयना कर सख्त कानूनी शिकंजा कसने के निर्देश दिए।
3. बिखरते रिश्ते: घरेलू कलह और महिला अपराध
पारिवारिक विवाद, आपसी मतभेद और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर भी दर्जनों आवेदन मिले। इन मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए इन्हें तुरंत महिला सेल और पुलिस के विशेष विंग को सौंपा गया।
न्याय में देरी, न्याय न मिलने के बराबर
जनसुनवाई के दौरान सभी जोन्स के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस कमिश्नर ने साफ लफ्जों में कहा कि इंदौर पुलिस नागरिकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
”हर शिकायतकर्ता की समस्या का निवारण तय समय सीमा में होना चाहिए। पुलिसिंग ऐसी हो कि आम आदमी को थाने आने में डर न लगे और अपराधियों के मन में खौफ हो।”
— संतोष कुमार सिंह, पुलिस कमिश्नर, इंदौर
कई गंभीर मामलों में कमिश्नर ने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश देकर मौके पर ही जांच शुरू करवाई, जिससे पीड़ितों के चेहरों पर राहत साफ देखी जा सकती थी।
कोर्ट-कचहरी के चक्करों से मुक्ति दिला रहे हैं ‘मध्यस्थता केंद्र’
इस जनसुनवाई की एक बड़ी खासियत यह भी रही कि पुलिस केवल डंडा चलाने या एफआईआर दर्ज करने पर ही जोर नहीं दे रही, बल्कि बिखरते परिवारों को बचाने की मुहिम भी चला रही है। पुलिस द्वारा संचालित मध्यस्थता केंद्रों के माध्यम से पारिवारिक और आपसी विवादों में विशेषज्ञों द्वारा काउंसलिंग की जा रही है। इसका असर यह हो रहा है कि सालों से कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रहे लोग अब सौहार्दपूर्ण माहौल में आपसी सहमति से विवाद सुलझा रहे हैं।
