धार। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने धार के ऐतिहासिक सरकारी इमामबाड़े में ताजिया निर्माण को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने सांप्रदायिक और पारंपरिक महत्व को देखते हुए याचिकाकर्ताओं को केवल पांच दिनों के लिए इमामबाड़े का कब्जा सौंपने का आदेश दिया है। अदालत का मानना है कि यदि याचिकाकर्ताओं और उनके समुदाय को पांच दिनों के लिए यह अवसर दिया जाता है, तो इससे राज्य सरकार को कोई वैधानिक नुकसान नहीं होगा।
यह आदेश 25 जून 2026 को न्यायमूर्ति सुबोध अभयंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की समन्वय पीठ द्वारा ‘सिद्दीकी बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य’ (W.P. संख्या 37514/2025 और W.P. संख्या 15440/2026) के मामले में पारित किया गया। अदालत ने धार के सक्षम प्राधिकारी/एसडीओ को निर्देश दिया है कि वे एक दिन के भीतर याचिकाकर्ता सिद्दीकी को सरकारी इमामबाड़े की चाबियां सौंप दें। इसके साथ ही याचिकाकर्ता को यह वचन देना पड़ा है कि ताजिया कार्यक्रम संपन्न होने के बाद, वे 1 जुलाई 2026 को दोपहर 12:00 बजे तक चाबियां निश्चित रूप से प्रशासन को वापस कर देंगे।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि पूर्व में सक्षम अधिकारियों (एसडीओ) के पत्रों में याचिकाकर्ताओं को ‘मुस्लिम ताजिया समिति, धार’ का सदर (अध्यक्ष) और पूर्व उपाध्यक्ष माना गया है, जिससे यह सिद्ध होता है कि वे इस समिति के प्राधिकृत सदस्य हैं। दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता सोनल गुप्ता और उप महाधिवक्ता श्रेय राज सक्सेना ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि लोक परिसर बेदखली अधिनियम, 1974 के तहत याचिकाकर्ताओं की बेदखली के आदेश पहले ही जारी हो चुके हैं और उन्हें छोटा इमामबाड़ा तथा जमात खाना में तजिया निर्माण के लिए वैकल्पिक स्थान भी दिया गया था।
इस आदेश के साथ कोर्ट ने सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही याचिकाकर्ताओं पर यह सख्त शर्त लगाई गई है कि वे विवादित संपत्ति के ढांचे में कोई बदलाव या तोड़फोड़ नहीं करेंगे और उसे साफ-सुथरी स्थिति में राज्य को लौटाएंगे। यह अंतरिम व्यवस्था केवल 1 जुलाई 2026 तक के लिए है, और इस पूरे मामले में पक्षों के वास्तविक कानूनी अधिकारों को तय करने के लिए अगली विस्तृत सुनवाई 22 जुलाई 2026 को तय की गई है, जिसके बाद ही इस विवाद का स्थायी समाधान सामने आ सकेगा।
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