मनावर और बदनावर में धोखाधड़ी के मामले दर्ज, 3.67 लाख का गबन
धार। फाइनेंस कंपनियों और बैंकों में ग्राहकों के भरोसे का सौदा कर लाखों रुपये डकारने के दो बड़े मामले धार जिले के मनावर और बदनावर थानों में सामने आए हैं। लोन चुकाने के नाम पर सीधे-साधे ग्रामीणों और आदिवासियों से ली गई किस्तों की राशि को बैंक के खाते में जमा करने के बजाय, कंपनियों के ही कर्मचारियों ने अपनी जेब में रख लिया। पुलिस ने दोनों ही मामलों में अमानत में खयानत और धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पहली घटना में मनावर थानांतर्गत क्रेडिट एक्सेस ग्रामीण लिमिटेड बैंक के ब्रांच मैनेजर आरिफ खान की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी कर्मचारी गोविंद सिंह (शाजापुर) के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि गोविंद सिंह ने 2 जनवरी 2026 से 10 अप्रैल 2026 के बीच जोहरी कॉलोनी स्थित बैंक शाखा के क्षेत्र में ग्रामीण और आदिवासी ग्राहकों से लोन फोर-क्लोजर (लोन बंद करने) और किस्तों के नाम पर नगद और अपने पर्सनल ‘फोन-पे’ अकाउंट में कुल 2,06,740 रुपये लिए, लेकिन उन्हें बैंक में जमा नहीं किया।
वहीं दूसरी घटना में बदनावर थानांतर्गत फिनोवा कैपिटल फाइनेंस कंपनी के अधिकारी अर्जुनसिंह गौड़ (रतलाम) की शिकायत पर बदनावर पुलिस ने आरोपी कर्मचारी शुभम पारगी के खिलाफ केस दर्ज किया है। शुभम ने 1 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 के बीच बडनगर रोड स्थित कंपनी के ग्राहकों से कलेक्शन के 1,60,968 रुपये वसूले, लेकिन उसे आज तक कंपनी के खाते में जमा न कर खुद हड़प लिया।
दोनों ही मामलों में कंपनियों को जब अपने स्तर पर इस गबन की भनक लगी, तब वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पीड़ितों ने थाने पहुंचकर क्रमशः शुक्रवार 26 जून को शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 316 के तहत वित्तीय हेराफेरी के मुकदमे कायम किए हैं।
माइक्रो-फाइनेंस कंपनियों में फील्ड स्टाफ द्वारा इस तरह की धोखाधड़ी का यह कोई पहला मामला नहीं है। जानकारों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सिस्टम और निजी फाइनेंस कंपनियों के प्रति लोगों का भरोसा कमजोर होता है। आने वाले समय में कंपनियां अपने कलेक्शन सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल बनाने और कर्मचारियों पर निगरानी रखने के लिए कड़े नियम लागू कर सकती हैं, ताकि सीधे-साधे ग्रामीणों को ऐसे धोखेबाजों से बचाया जा सके।
