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जमीन के टुकड़े के लिए अपनों पर बहे लाठी-डंडे : अमझेरा और राजगढ़ में विवाद के बाद जमकर मारपीट

दो अलग-अलग थानों में 15 आरोपियों पर मामला दर्ज, महिलाओं समेत कई घायल

धार। जमीन के विवाद किस कदर इंसानी रिश्तों और आपसी भाईचारे पर भारी पड़ रहे हैं, इसकी बानगी धार जिले के दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में देखने को मिली। महज़ दो दिनों के भीतर अमझेरा और राजगढ़ में जमीनी रंजिश को लेकर दो परिवारों पर जानलेवा हमला कर दिया गया। इन दोनों ही घटनाओं में हमलावरों ने न सिर्फ लाठी-डंडों और हथियारों का इस्तेमाल किया, बल्कि घर में घुसकर महिलाओं को भी बेरहमी से निशाना बनाया। पुलिस ने दोनों मामलों में तत्परता दिखाते हुए कुल 15 नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

पहली घटना मे अमझेरा थानांतर्गत यह मामला ग्राम बलेडी (भोपावर) का है। 24 जून को दोपहर करीब 12 बजे फरियादी सोहन भील के खेत के सेडे पर आरोपी कृष्णा मावी, रामू, देमलीबाई, पुनकीबाई, कविता, ज्योति, लाला, मन्ना, लक्ष्मीनारायण और प्रभु (कुल 10 आरोपी) ने एकमत होकर जमीनी विवाद को लेकर गाली-गलौज शुरू कर दी। जब सोहन और उसके साथियों ने मना किया, तो आरोपियों ने दराते और लट्ठ से हमला कर दिया। इस मारपीट में कांताबाई चौहान, दुर्गाबाई चौहान और लक्ष्मीबाई के सिर व हाथ में गंभीर चोटें आईं। आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। इस मामले की रिपोर्ट 26 जून को दर्ज कराई गई।

दूसरी घटना में राजगढ़ थानांतर्गत यह वारदात 26 जून को शाम करीब 6:00 बजे ग्राम आम्बा में हुई। यहाँ फरियादिया केलाबाई पति दिनेश मावी अपने घर पर बेटियों ललिता, कलावती, सतुरी और भांजी सुमित्रा के साथ थी। तभी जमीन विवाद की रंजिश में आरोपी बापुसिंह, तोलसिंह, हिराबाई, सावन और दिपु (कुशलपुरा निवासी) एकमत होकर घर के अंदर घुस आए। आरोपियों ने गालियां देते हुए घर में मौजूद महिलाओं और लड़कियों के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे उन्हें चोटें आईं और जाते-जाते जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने उसी रात 9:09 बजे केस दर्ज कर लिया।

जमीन विवाद से उपजे इन दोनों मामलों में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं 296, 115(2), 351(3), 190 और 191 (गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होना और दंगा करना) के तहत अपराध पंजीकृत किया है। राजगढ़ मामले में घर में घुसकर मारपीट करने के कारण धारा 333 (गृह-अतिचार) भी जोड़ी गई है। ग्रामीण इलाकों में बढ़ते इस तरह के जमीनी टकरावों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस अब विवादित जमीनों के सीमांकन और आपसी समझौतों को लेकर कड़े कदम उठा सकती है, ताकि भविष्य में इस तरह की हिंसक पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

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