Headlines

‘सरस्वती लोक’ से होगा धार का कायाकल्प, मां वाग्देवी जल्द लौटेंगी भारत-पवैया

बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष पवैया ने पूजा-अर्चना कर भोजशाला का अवलोकन किया

धार। बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया मंगलवार को धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर पहुंचे, जहां उन्होंने मां वाग्देवी के दर्शन और सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ में हिस्सा लिया। इस दौरान पत्रकारों से चर्चा करते हुए पवैया बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने भोजशाला के मौजूदा घटनाक्रम को अयोध्या के बाद सनातनियों की अस्मिता की दूसरी सबसे बड़ी जीत करार दिया।

मंगलवार को धार के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में पूर्व बजरंग दल प्रमुख जयभान सिंह पवैया ने दौरा और अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने परिसर में विशेष पूजा-अर्चना की और वहां होने वाले साप्ताहिक सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ में सहभागिता निभाई। पवैया ने मीडिया से बात करते हुए इस आंदोलन के इतिहास, बलिदानियों और एएसआई (पुरातत्व विभाग) के उत्खनन में मिली मूर्तियों का विशेष रूप से उल्लेख किया।

पवैया ने साल 1996 के अपने संघर्ष को याद करते हुए कहा, “6 दिसंबर 1996 को गंगाजल चढ़ाने के लिए इसी परिसर में संगठनों को लाठियों और घुड़सवार पुलिस ने रोक कर जेल में डाल दिया था।” उन्होंने इसे मालवा का ‘नालंदा’ बताते हुए दुख जताया कि प्राचीन काल में यहां के आचार्यों के परिवारों को तलवारों से काट दिया गया और भगवान की मूर्तियों को जमींदोज कर दिया गया, जो हाल ही में पुरातत्व विभाग के उत्खनन में नीचे दबी मिली हैं। उन्होंने 700 वर्षों तक संघर्ष करने वाले योद्धाओं और आंदोलन के तीन बलिदानियों को नमन किया।

पवैया ने बताया कि “सनातनी उदार हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने अपने आस्था के केंद्रों के खंडहरों की भी परिक्रमा करना नहीं छोड़ा। अयोध्या के ढांचे की परिक्रमा करते रहे, भोजशाला के लिए प्रतिज्ञा लेते रहे और इसी का परिणाम है कि आज भोजशाला के सत्य को सत्य माना गया है।”

इस दौरे के दौरान पवैया ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ‘सरस्वती लोक’ बनाने की घोषणा और बलिदानियों के परिवारों को सम्मान देने के लिए हृदय से साधुवाद दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस तरह ‘महाकाल लोक’ बनने से उज्जैन का कायाकल्प हुआ है, उसी तरह ‘सरस्वती लोक’ के रूप में पुनरुद्धार होने के बाद धार में भी पूरे भारत और संसार से लोग आएंगे। उन्होंने अंत में मां वाग्देवी से प्रार्थना की कि लंदन में विराजी उनकी प्रतिमा जल्द ही भारत लौट आए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *