कानवन की फर्म पर कीटनाशक अधिनियम और बीएनएस के तहत मुकदमा, इंदौर के सप्लायर समेत दो आरोपी
धार। किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ करने और कीटनाशक व्यापार के नियमों को ताक पर रखकर अवैध कारोबार करने वाली फर्मों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। कानवन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली एक प्रमुख कृषि फर्म द्वारा न केवल नियमों की अनदेखी की जा रही थी, बल्कि बिना वैध अधिकार पत्र के कीटनाशकों का अवैध भंडारण और व्यापार कर किसानों के साथ धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा था। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने इस मामले में गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं कीटनाशी निरीक्षक (बदनावर) घनश्याम पिता भगवतीलाल बग्गड़ (उम्र 32 वर्ष) ने कानवन स्थित आरोपी की दुकान ‘महावीर इंटरप्राइजेस’ पर निरीक्षण की कार्रवाई की थी। यह पूरी अनियमितता 01 जून से 06 जुलाई 2026 के बीच की समयावधि के दौरान सामने आई। मामले में वरिष्ठ अधिकारी द्वारा लिखित आवेदन पेश किए जाने के बाद, कानवन थाना पुलिस ने 08 जुलाई बुधवार को दोपहर 03:20 बजे विधिवत एफआईआर दर्ज की। इस मामले में महावीर इंटरप्राइजेस कानवन के संचालक दिनेश पिता हस्तीमल जैन और इंदौर (307 बी, 7 स्टर्लिंग स्काय लाईन, बिचोलि हपसी रोड) के निवासी रामकुमार चौधरी पिता रामसिंह चौधरी को आरोपी बनाया गया है।
निरीक्षण के दौरान जांच टीम को दुकान पर कई गंभीर खामियां और अवैध गतिविधियां मिलीं। आरोपी द्वारा अपनी फर्म महावीर इंटरप्राइजेस में डिस्प्ले बोर्ड प्रदर्शित नहीं किया गया था और न ही कीटनाशकों की स्टॉक पंजी (रजिस्टर) का संधारण किया गया था। इसके अलावा, किसानों को नगद या उधार का कैश मेमो जारी नहीं किया जा रहा था और जो कैश मेमो मिले, उन पर दवाई के तकनीकी नाम का कोई उल्लेख नहीं था। सबसे गंभीर उल्लंघन यह पाया गया कि गुजरात बायो इंसेक्टीसाइड (पीथमपुर) की दवाई का फर्म के लाइसेंस में अधिकार पत्र दर्ज कराए बिना ही, उक्त औषधि का बड़े पैमाने पर अवैध भंडारण और व्यापार किया जा रहा था। इस तरह नियम विरुद्ध व्यापार कर कृषकों से धोखाधड़ी की गई और उनसे राशि हड़पी गई।
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(3) एवं कीटनाशक अधिनियम की धारा 29, 10(4), 15 और 10(D) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। कृषि विभाग और पुलिस की इस संयुक्त सख्ती के बाद क्षेत्र के अवैध कीटनाशक कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों को नकली या बिना मानक प्रक्रिया के कीटनाशक बेचने वालों पर आगे भी ऐसी पैनी नजर रखी जाएगी, ताकि खेती-किसानी को नुकसान से बचाया जा सके।
