बुजुर्गों के जीवन में घुलेगी गुलाब की खुशबू
धार। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अंतर्गत संचालित भोज शोध संस्थान के श्रद्धालय वृद्धाश्रम में अब बुजुर्गों का जीवन गुलाब की खुशबू से महकेगा। यहां पहले से मौजूद औषधि और फल उद्यान के साथ ही अब एक खूबसूरत गुलाब उद्यान भी पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुका है। अल्प समय में विकसित हुए इस उद्यान ने वृद्धाश्रम के परिसर को एक नई रंगत दे दी है।
भोज शोध संस्थान के निदेशक डॉ. दीपेन्द्र शर्मा ने बताया कि संस्थान द्वारा संचालित श्रद्धालय वृद्धाश्रम (धार) में हाल ही में ‘एक पेड़ मां के नाम’ प्रकल्प के तहत इस विशेष गुलाब उद्यान को विकसित किया गया है। इस पूरे अभियान को सफल बनाने में इंदौर से कमल मोदी, भूपेश शर्मा, महू से अजय कैथवास और धन्नड से तन्मय ओमप्रकाश शर्मा ने अपना विशेष सहयोग और योगदान दिया।
अपनों के साथ से महकी बगिया
इस रचनात्मक कार्य में आश्रम के ही वृद्धजनों ने बढ़-चढ़कर अपनी सेवाएं दीं। इनमें भागवंता बाई, कृष्णा बाई, कला बाई, तोताराम भाई, शिव आर्य, रामेश्वर पटेल, महेश पाटीदार, माखन राठौर, पूरनचंद सक्सेना सहित रानी पंवार, विद्या गुंजाल, रोशनी राठौर, भूमि और दक्षिता का सराहनीय योगदान रहा। मीडिया प्रभारी राकी मक्कड़ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन सभी के मिले-जुले प्रयासों से ही इतनी जल्दी यह सुंदर प्रोजेक्ट जमीन पर उतर सका है।
सकारात्मक दिनचर्या के लिए मिलेगा बेहतरीन वातावरण
इस नए उद्यान में देशी किस्म के कुल 150 गुलाब के पौधे रोपे गए हैं। इन पौधों को सुरक्षित रखने और इनकी विशेष देखरेख की जिम्मेदारी तोताराम लववंशी व कला बाई को सौंपी गई है। वृद्धाश्रम में पहले से मौजूद फल और औषधि उद्यान के बाद इस तीसरे प्रकल्प (गुलाब उद्यान) के शुरू होने से न केवल यहां का पर्यावरण बेहतर होगा, बल्कि यह आने वाले समय में आश्रम के बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक दिनचर्या के लिए एक बेहतरीन आधार साबित होगा।

