धार। सुशासन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए मध्य प्रदेश शासन एक बड़ी पहल करने जा रहा है। अब भोपाल के आला अधिकारियों से लेकर जिलों का प्रशासनिक अमला केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीधे जनता के द्वार पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुनेगा और मौके पर ही निराकरण सुनिश्चित करेगा।
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए घोषणा की है कि प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान-2026’ आगामी 7 अगस्त 2026 से शुरू होकर 8 जनवरी 2027 तक संचालित किया जाएगा। इस कॉन्फ्रेंसिंग में जिलों से कलेक्टर राजीव रंजन मीना, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक चौधरी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस अभियान के तहत मुख्यमंत्री, मंत्रीगण, मुख्य सचिव, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी नियमित रूप से मैदानी स्तर पर भ्रमण कर आम नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित करेंगे।
हर शुक्रवार समर्पित रहेगा जनसंवाद को
अभियान की सबसे खास बात यह है कि प्रत्येक सप्ताह शुक्रवार का दिन विशेष रूप से फील्ड भ्रमण के लिए निर्धारित किया गया है। अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर, इस दिन किसी भी स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित नहीं की जाएंगी। भोपाल से लेकर संभाग और जिला स्तर तक का पूरा प्रशासन मैदानी भ्रमण, जनसंवाद और समस्याओं के निपटारे में लगा रहेगा। जिला स्तर पर कलेक्टर और अन्य अधिकारी जन संवाद के साथ-साथ ‘उद्योग संवाद’ भी आयोजित करेंगे, जिसमें वृहद, एमएसएमई और कुटीर उद्योगों से जुड़े उद्यमियों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। अभियान के पहले चरण में अगस्त माह के लिए बड़वानी, सीधी, श्योपुर एवं पांढुर्ना जिलों को निर्धारित किया गया है।

सार्वजनिक संपत्तियों और सेवाओं का होगा गहन निरीक्षण
अभियान के दौरान भ्रमण से पहले सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई और लोक सेवा गारंटी अधिनियम के लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर उन्हें शून्य करने का प्रयास होगा। भ्रमण के दौरान सड़कों, अमृत सरोवरों, जल जीवन मिशन की संरचनाओं, आंगनवाड़ियों, अस्पतालों, स्कूलों, पुलिस थानों, लोक सेवा केंद्रों, खाद-बीज दुकानों, राशन दुकानों और निजी संस्थानों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया जाएगा। इसके साथ ही नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, किसान फार्मर आईडी, आयुष्मान कार्ड, समग्र ई-केवाईसी और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी हितग्राहीमूलक योजनाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लिया जाएगा।
सादगी और मितव्ययिता पर विशेष जोर
इस पूरे अभियान को अत्यंत सादगी और मितव्ययिता के साथ संचालित किया जाएगा। किसी भी प्रकार की अनावश्यक साज-सज्जा या गैर-जरूरी खर्च पर सख्त मनाही रहेगी। अधिकारियों के लिए वाहनों की पूलिंग व्यवस्था अपनाई जाएगी और सभी संवाद कार्यक्रम शासकीय भवनों या सार्वजनिक स्थलों पर ही आयोजित किए जाएंगे।
सामान्य प्रशासन विभाग को इस अभियान का नोडल विभाग बनाया गया है। यह अभियान मुख्य रूप से संवाद, समाधान, संवेदनशीलता और सादगी के चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। शिकायतों के निपटारे से आगे बढ़कर जनभागीदारी आधारित सुशासन की दिशा में यह पहल शासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करेगी। अभियान के पूर्व और बाद के आंकड़ों की तुलना करके जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा, जिसकी नियमित समीक्षा सीधे मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव स्तर पर की जाएगी।
