चालक 40% झुलसा, ट्रैफिक जवानों की तत्परता से टला बड़ा हादसा
इंदौर। सड़क पर सामान्य गति से दौड़ रही एक कार अचानक लपटों में घिर गई और चंद पलों में लपटों का बवंडर बन गई। अंदर मौजूद चालक को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वह आग के बीच फंस गया। चीख-पुकार और दहशत के बीच मौके पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने बिना वक्त गंवाए कांच तोड़े, युवक को बाहर निकाला और सीपीआर देकर उसकी उखड़ती सांसें थाम लीं।
यह हादसा इंदौर के चोइथराम मंडी के पास उस वक्त पेश आया, जब रूपेश यादव नामक युवक अपनी रिट्स कार से जा रहा था। अचानक चलती गाड़ी में भीषण आग लग गई। लपटों की तीव्रता इतनी तेज थी कि रूपेश बाहर नहीं निकल सका और करीब 40 प्रतिशत तक झुलस गया। चौराहे पर मुस्तैद यातायात थाना जोन-4 के प्रभारी सुमित बिलोनिया, आरक्षक विजय पाटीदार, प्रधान आरक्षक कमल और एएसआई जी.पी. तिवारी तुरंत मौके पर पहुंचे। जवानों ने सूझबूझ दिखाते हुए कार का शीशा तोड़ा और रूपेश को सुरक्षित बाहर खींच लिया।
वाहन से निकाले जाने के दौरान युवक की सांसें रुक रही थीं। पुलिसकर्मियों ने तत्काल मौके पर ही प्राथमिक उपचार के तहत सीपीआर देकर उसे होश में लाने का प्रयास किया। इसके बाद एक लोडिंग रिक्शा की व्यवस्था कर घायल को फौरन पास के चोइथराम अस्पताल की बर्न यूनिट पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार जारी है। हादसे में कार के अंदर रखे कुछ नोट भी जलकर खाक हो गए। पुलिस टीम ने सूबेदार और अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर फायर ब्रिगेड की मदद से धधकती कार की आग पर काबू पाया।
डीसीपी राजेश कुमार त्रिपाठी ने ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की त्वरित सूझबूझ और मानवीय संवेदनशीलता की खुले दिल से प्रशंसा की है। चलती गाड़ियों में तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन ट्रैफिक जवानों का यह देवदूत बनकर सामने आना न केवल खाकी की छवि को मजबूत करता है, बल्कि यह भी रेखांकित करता है कि आपात स्थिति में सीपीआर जैसा बुनियादी प्राथमिक उपचार किसी की जिंदगी और मौत के बीच का सबसे बड़ा फैसला साबित हो सकता है।
