गंदगी फैलाने वालों पर 1.24 लाख रुपए का जुर्माना
पान-गुटखे के दागों पर लगेगी रोक, रतलाम मंडल का गहन स्वच्छता अभियान
उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और यात्रियों को अब रेलवे स्टेशन पर पान-गुटखे की पीक और जिद्दी दाग-धब्बों से निजात मिलेगी। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने स्टेशन को साफ-सुथरा और चमकदार बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक और सख्त निगरानी का एक अनूठा मॉडल लागू किया है, जिसके तहत दीवारों पर नैनो कोटिंग की जा रही है और गंदगी फैलाने वालों पर लगातार कार्रवाई जारी है।
रतलाम मंडल के वाणिज्य विभाग द्वारा 13 सितंबर को जारी जानकारी के अनुसार, उज्जैन रेलवे स्टेशन पर पिछले एक सप्ताह से गहन स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि स्टेशन परिसर में चिह्नित 6663 वर्ग फीट क्षेत्र में विशेष नैनो कोटिंग की जा रही है। इसके साथ ही यात्रियों को नुक्कड़ नाटक, सोशल मीडिया रील्स, वीडियो और नए पोस्टर-बैनर के जरिए जागरूक किया जा रहा है।
संवेदनशील स्थानों पर विशेष नजर और जुर्माना
अभियान के तहत स्टेशन परिसर के उन हिस्सों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जहां आमतौर पर गंदगी की आशंका अधिक होती है—जैसे सीढ़ियों के पीछे का हिस्सा, कोने, वाटर बूथ के आसपास का क्षेत्र और फुटओवर ब्रिज के किनारे। एंटी-लिटरिंग जांच के दौरान पिछले तीन दिनों में सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाते पाए गए लगभग 500 यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कुल 1.24 लाख रुपए का जुर्माना वसूला गया है।
नैनो कोटिंग तकनीक से आसान होगी सफाई
स्टेशन परिसर के 6663 वर्ग फीट क्षेत्र में लागू की जा रही नैनो कोटिंग एक पारदर्शी और बेहद पतली सुरक्षात्मक परत तैयार करती है। यह तकनीक पानी, तेल, थूक और अन्य तरल पदार्थों को सतह पर चिपकने या सोखने से रोकती है। इससे दीवारों के मूल स्वरूप को नुकसान पहुंचाए बिना दाग-धब्बों को आसानी से साफ किया जा सकेगा और बार-बार होने वाले रखरखाव की आवश्यकता भी कम होगी।
धार्मिक और पर्यटन केंद्र होने के कारण उज्जैन रेलवे स्टेशन पर रोजाना 80 हजार से एक लाख यात्रियों की आवाजाही होती है। इतनी बड़ी संख्या के बीच स्वच्छता बनाए रखना हमेशा से एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती रहा है। रेलवे प्रशासन का मानना है कि नैनो कोटिंग तकनीक और निरंतर जन-जागरूकता के इस समन्वित प्रयास से भविष्य में न केवल स्टेशन की सफाई व्यवस्था अधिक टिकाऊ बनेगी, बल्कि यात्रियों में भी रेलवे संपत्ति को साफ रखने के प्रति दीर्घकालिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।
