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बेटियां अब बोझ नहीं, समाज का गौरव: जिला पंचायत में गूंजी ‘लाड़लियों’ की सफलता की गूँज

लाड़ली लक्ष्मी दिवस पर 50 बालिकाओं का सम्मान; केंद्रीय राज्यमंत्री बोलीं- “बेटियां अब परिवार की चिंता से मुक्त, योजना बनी वरदान”

धार | “एक दौर था जब बेटियों को बोझ समझा जाता था और कोख में ही मार दिया जाता था। लेकिन आज वक्त बदल चुका है। अब बेटियों की पढ़ाई से लेकर शादी तक की फिक्र सरकार कर रही है।” यह प्रेरणादायी शब्द केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने शनिवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित ‘लाड़ली लक्ष्मी दिवस’ समारोह के दौरान कहे।

इस अवसर पर जिले की उन 50 लाड़लियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने कक्षा 5वीं, 8वीं, 10वीं और 12वीं में शानदार प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन किया है।

दुनिया में सबसे ज्यादा महिला पायलट भारत में: विधायक नीना वर्मा

विधायक नीना वर्मा ने बालिकाओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि आज हमारी बेटियां आसमान छू रही हैं। उन्होंने गर्व से बताया कि, “विश्व में सबसे ज्यादा महिला पायलट भारत की बेटियां हैं। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच ने बेटियों को आत्मनिर्भर बनाया है।” उन्होंने बेटियों से आह्वान किया कि वे बिना किसी आर्थिक चिंता के अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें, क्योंकि पूरी व्यवस्था शासन कर रहा है।

आंकड़ों की नजर में: धार की 1.60 लाख बेटियाँ लाभान्वित

जिला कार्यक्रम अधिकारी सुभाष जैन ने बताया कि जिले में इस योजना की जड़ें काफी गहरी हो चुकी हैं:

  • शुरुआत: वर्ष 2006

  • अब तक लाभ: 1 लाख 60 हजार बालिकाओं को मिला लाभ।

  • सम्मान: 50 मेधावी छात्राओं को शील्ड और प्रशस्ति पत्र।

भावुक हुए माता-पिता: “योजना ने दिखाया शिक्षा का रास्ता”

कार्यक्रम का सबसे खास पल वह था जब लाड़लियों के माता-पिताओं ने अपने अनुभव साझा किए। पल्लवी पंडित, कु. तनिष्का और ममता की माताओं सहित कु. गौरी के पिता संतोष पुराणिक ने भावुक होते हुए शासन का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इस योजना की मदद से ही वे अपनी बेटियों को अच्छी शिक्षा दिला पा रहे हैं।

संचालन और आभार कार्यक्रम का सफल संचालन चेतना राठौड़ ने किया। समारोह में बेटियों की सफलता को देख पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

यह समारोह न केवल एक सम्मान कार्यक्रम था, बल्कि बदलती सामाजिक सोच का प्रतिबिंब भी रहा, जहाँ ‘लाड़ली’ अब सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि सफलता का पर्याय बन चुकी है।

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