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स्कूलों और सरकारी दफ्तरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य

कार्य में लापरवाही पर गाज गिरना तय, टीएल बैठक में प्रभारी कलेक्टर ने दिए निर्देश

धार | कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सोमवार को आयोजित समयसीमा (TL) बैठक में प्रभारी कलेक्टर अभिषेक चौधरी सख्त तेवरों में नजर आए। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जल संरक्षण और जनहित के कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक का मुख्य फोकस ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ रहा, जिसमें उन्होंने भविष्य की जल सुरक्षा के लिए ‘एक-एक बूंद’ बचाने का मंत्र दिया।

बैठक के 5 बड़े फैसले: रस्म अदायगी नहीं, अब जमीन पर दिखाना होगा काम

प्रभारी कलेक्टर अभिषेक चौधरी ने कलेक्ट्रेट की बैठक में अधिकारियों की क्लास लेते हुए पाँच मोर्चों पर सख्त रणनीति तैयार की है। इसे महज एक समीक्षा बैठक न मानकर प्रशासनिक सर्जरी माना जा रहा है:

1. वाटर हार्वेस्टिंग अब मजबूरी नहीं, जरूरी: कलेक्टर ने दो टूक कहा कि भविष्य की प्यास बुझाने के लिए गिरता भू-जल स्तर सबसे बड़ी चुनौती है। अब जिले के हर सरकारी स्कूल और शासकीय संस्थानों में ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग’ सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। लक्ष्य साफ है—बारिश की एक-एक बूंद को जमीन के भीतर उतारना ताकि जल स्रोत फिर से जीवित हो सकें।

2. नालों की सफाई में ‘नो कॉम्प्रोमाइज’: मानसून की दस्तक से पहले नगर पालिका को अल्टीमेटम दिया गया है। शहरी क्षेत्रों के छोटे-बड़े नालों की सघन सफाई के निर्देश दिए गए हैं ताकि बारिश के दौरान सड़कों पर जलभराव न हो और जल निकासी का सिस्टम पूरी तरह सुचारू रहे। इसमें लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की गाज गिरना तय है।

3. मुआवजा और भू-अर्जन पर ‘प्रायोरिटी’ चेक: विकास कार्यों में जमीन देने वाले प्रभावितों को अब दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि भू-अर्जन से संबंधित जितने भी लंबित प्रकरण हैं, उन्हें प्राथमिकता पर रखा जाए। प्रभावितों को नियमानुसार समय पर मुआवजा मिले, यह सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी।

4. वनाधिकार दावों का होगा 100% री-टेस्ट: वन विभाग की कार्यप्रणाली पर नजर रखते हुए चौधरी ने निर्देश दिए कि निस्तर दावों का केवल निराकरण न हो, बल्कि पुराने लंबित दावों का शत-प्रतिशत पुनः परीक्षण किया जाए। नए दावों के लिए भी एक डेडलाइन तय की गई है ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति का हक न छूटे।

5. गर्मी में पेयजल संकट पर ‘क्विक रिस्पॉन्स’: बढ़ते तापमान और पेयजल की मांग को देखते हुए पीएचई और संबंधित निकायों को सतर्क किया गया है। ग्रामीण हो या शहरी क्षेत्र, कहीं भी पानी की किल्लत की शिकायत मिली तो अफसरों को तत्काल मौके पर पहुंचकर समाधान करना होगा। सप्लाई की सतत निगरानी के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम को और मजबूत करने को कहा गया है।

“पानी की एक-एक बूंद कीमती”

प्रभारी कलेक्टर चौधरी ने गिरते भू-जल स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर काम दिखना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि तकनीकी उपायों के जरिए वर्षा जल का संचयन किया जाए ताकि जल स्रोतों को रिचार्ज किया जा सके।

अफसरों को चेतावनी: गुणवत्ता से समझौता नहीं

बैठक में लंबित पत्रों की समीक्षा के दौरान चौधरी ने अधिकारियों को दो टूक कहा—“कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता से कोई समझौता नहीं होगा।” उन्होंने न्यायालयीन प्रकरणों में भी तथ्यों के साथ समय पर जवाब पेश करने के निर्देश दिए ताकि कानूनी प्रक्रिया में देरी न हो।

बैठक में अपर कलेक्टर संजीव केशव पाण्डेय सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी मौजूद रहे। प्रभारी कलेक्टर ने अंत में सभी को शासन की मंशानुसार प्राथमिकता के साथ जनसमस्याओं के निराकरण के निर्देश दिए।

सरकारी भवनों में वॉटर हार्वेस्टिंग की अनिवार्यता से न केवल भू-जल स्तर सुधरेगा, बल्कि यह आम जनता के लिए भी एक मिसाल बनेगा। अब देखना यह है कि मैदानी स्तर पर अधिकारी इन निर्देशों का पालन कितनी तेजी से करते हैं।

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