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धामनोद में बुजुर्ग के साथ ‘बड़ा गेम’; धोखाधड़ी और धमकी की FIR

करोड़ों की छत, गबन की नियत

धार | धामनोद पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी का एक ऐसा मामला दर्ज किया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। एक शख्स ने न केवल अपने मालिक के पैसों से दुकानें बनवाईं, बल्कि मालिक को कानों-कान खबर हुए बिना उन दुकानों को दूसरों को बेचकर करोड़ों की हेराफेरी कर दी। जब गुजरात निवासी बुजुर्ग ने अपना हक मांगा, तो उसे गालियां और जान से मारने की धमकी मिली।

क्या है पूरा मामला?

फरियादी हसन अली (71 वर्ष), जो मूल रूप से सरदारपुर के रहने वाले हैं और वर्तमान में अहमदाबाद (गुजरात) के पॉश इलाके ‘गोल्डन टावर’ में रहते हैं, उनकी धामनोद बस स्टैंड स्थित कॉम्प्लेक्स की छत पर यह पूरा ‘खेल’ रचा गया।

  • भरोसे का कत्ल: फरियादी ने आरोपी मोहम्मद रफीक उर्फ लालू को दुकानें बनवाने के लिए पैसे दिए थे।

  • बिना बताए सौदा: लालू ने फरियादी के ही पैसों से छत पर दुकानें तानीं और मालिक की बिना अनुमति, सहमति या जानकारी के उन्हें तीसरे पक्ष को बेच दिया।

  • दस्तावेजों में हेरफेर: आरोप है कि आरोपियों ने इस ‘सदोष लाभ’ को कमाने के लिए कागजों में कूटरचना (Forgery) की और बड़ी रकम डकार ली।

8 साल तक चलता रहा धोखा

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, यह धोखाधड़ी 26 जून 2018 से शुरू होकर 4 अप्रैल 2026 तक लगातार चलती रही। फरियादी को सालों तक अंधेरे में रखा गया। जब हसन अली को इस महाघोटाले की भनक लगी और उन्होंने विरोध किया, तो मुख्य आरोपी लालू और उसके साथी खुजेमा उर्फ बुरहानुद्दीन ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया।

“मेरे ही पैसों से दुकानें बनाईं और मुझे ही बेदखल कर दिया। जब हिसाब मांगा तो मां-बहन की गालियां दीं और जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया।”हसन अली (फरियादी)

इन धाराओं में फंसा ‘शिकंजा’

धामनोद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़क धाराओं के तहत केस दर्ज किया है:

  • 318(4): धोखाधड़ी (Cheating)

  • 296(a): अश्लील गालियां देना

  • 351(3): जान से मारने की धमकी देना

  • 3(5): सामान्य इरादा (Common Intent)

विश्लेषण: यह मामला प्रोपर्टी डीलिंग में बढ़ते ‘इनसाइडर फ्रॉड’ की ओर इशारा करता है। अगर आप भी बाहर रहते हैं और अपनी संपत्ति किसी ‘खास’ के भरोसे छोड़ रखी है, तो कागजों की जांच समय-समय पर जरूर करते रहें।

अब आगे: पुलिस अब उन दस्तावेजों की तलाश कर रही है जिनके जरिए दुकानों की रजिस्ट्री या इकरारनामे किए गए। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

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