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​सीएम का ‘सरप्राइज’ दौरा: नागझिरी साइलो केंद्र पहुंचे डॉ. मोहन यादव

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कहीं भी उतर सकता है मेरा हेलीकॉप्टर, वेयरहाउस की क्षमता बढ़ाने के दिए ऑर्डर-मुख्यमंत्री

भोपाल | मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इन दिनों ‘एक्शन मोड’ में हैं। “मैं कहीं भी हेलीकॉप्टर उतार सकता हूं और केंद्रों का निरीक्षण कर सकता हूं”– अपनी इस चेतावनी को हकीकत में बदलते हुए सीएम मंगलवार को अचानक उज्जैन के नागझिरी स्थित अडानी एग्रो साइलो उपार्जन केंद्र जा पहुंचे। वहां उन्होंने न केवल गेहूं खरीदी की व्यवस्थाएं देखीं, बल्कि बारिश की आशंका को देखते हुए तत्काल ‘वेयरहाउस की क्षमता’ बढ़ाने के आदेश भी जारी कर दिए।

अब नहीं भीगेगा अनाज, भुगतान भी 7 दिन में

​निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सरकार किसानों के पसीने की पूरी कीमत देगी। उन्होंने कहा कि वेयरहाउस की क्षमता बढ़ने से बेमौसम बारिश के दौरान अनाज को सुरक्षित रखा जा सकेगा।

  • पेमेंट अपडेट: सीएम ने बताया कि अब किसानों को फसल बेचने के 7 दिन के भीतर नियमित भुगतान मिल रहा है।
  • बढ़ाए गए कांटे: भीड़ कम करने और तौल प्रक्रिया तेज करने के लिए तौल कांटों की संख्या बढ़ा दी गई है।
  • बढ़ा समय: किसानों की सहूलियत के लिए स्लॉट बुकिंग की तारीख को भी आगे बढ़ाया गया है।

अब तक 41 लाख मीट्रिक टन की खरीदी

मुख्यमंत्री ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि प्रदेश में अब तक 41 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। सरकार अपनी क्षमता और बढ़ाने पर काम कर रही है। साथ ही चना और मसूर की खरीदी भी पैरेलल चल रही है।

किसान कल्याण वर्ष मना रही सरकार

​डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह साल ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि केंद्र पर आने वाले किसानों को छाया, पानी और बैठने की समुचित व्यवस्था मिलनी चाहिए।

सीएम की दो टूक: कोई कष्ट हो तो सीधे प्रशासन को बताएं

​निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने किसानों से संवाद करते हुए कहा– “मैं खुद हर केंद्र की मॉनिटरिंग कर रहा हूं। अगर कहीं भी कोई कष्ट हो, तो जिला प्रशासन के कंट्रोल रूम में संपर्क करें।” इससे पहले सीएम शाजापुर और खरगोन में भी इसी तरह का ‘सरप्राइज’ दौरा कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री के दौरे के 3 बड़े असर

  1. तत्काल आदेश: बारिश से अनाज बचाने के लिए वेयरहाउस कैपेसिटी बढ़ाने के ऑर्डर रिलीज।
  2. प्रशासनिक सतर्कता: आकस्मिक दौरे के डर से केंद्रों पर अधिकारी अब मुस्तैद नजर आ रहे हैं।
  3. पेमेंट मॉनिटरिंग: 7 दिनों के भीतर राशि खाते में पहुंचना सुनिश्चित किया गया।

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