धार। जिला पंचायत सभाकक्ष में जब विकास कार्यों की समीक्षा बैठक शुरू हुई, तो कलेक्टर राजीव रंजन मीना के तेवर साफ थे—योजनाएं सिर्फ फाइलों में नहीं, धरातल पर दिखनी चाहिए। जल गंगा अभियान और ग्रामीण विकास विभाग की हाई-लेवल मीटिंग में कलेक्टर ने दोटूक कहा कि अभियान में शामिल सभी 12 विभाग तय समय से पहले अपने टारगेट पूरे करें। ग्रामीण इलाकों में निर्माण कार्यों की सुस्ती पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि काम समय पर और हाई क्वालिटी के होने चाहिए ताकि जनता को तुरंत फायदा मिले।
पीएचई की रिपोर्ट पर कलेक्टर का ‘क्रॉस वेरिफिकेशन’
बैठक में जब लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग ने अपनी कॉलर ऊंची करते हुए नल-जल योजना में 80 फीसदी सफलता का आंकड़ा पेश किया, तो कलेक्टर ने उन्हें तुरंत टोक दिया। कलेक्टर ने कड़े लहजे में कहा:
“केवल कागजी आंकड़ों पर निर्भर रहकर खुश होने की जरूरत नहीं है। अधिकारी फील्ड में जाएं, फिजिकल निरीक्षण करें और रैंडम वेरिफिकेशन (भौतिक सत्यापन) कर जमीनी हकीकत का पता लगाएं।”
उन्होंने जनपद पंचायत के सीईओ को निर्देश दिए कि जिन ग्राम पंचायतों को नल-जल योजनाएं हैंडओवर की जा चुकी हैं, वहां की रेगुलर मॉनिटरिंग और समीक्षा की जाए।
सरदारपुर में पानी ‘फुल’, कुछ पंचायतों में ‘गुल’
समीक्षा के दौरान जब पेयजल आपूर्ति का फीडबैक लिया गया, तो सरदारपुर जनपद सीईओ ने दावा किया कि उनके क्षेत्र के गांवों में सुचारू रूप से पानी की सप्लाई हो रही है। हालांकि, कुछ अन्य पंचायतों से आंशिक रूप से (कम मात्रा में) पानी पहुंचने की शिकायतें सामने आईं। इस पर कलेक्टर ने अफसरों को तत्काल व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।
माही डैम से बुझेगी प्यास, बाग और रिंगनोद में ट्रायल शुरू
‘जल जीवन मिशन’ की समीक्षा में अधिकारियों ने बताया कि जिले में फिलहाल कुल 7 प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनमें से 3 मुख्य परियोजनाएं हैं।
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राजोद परियोजना: जलापूर्ति (वाटर सप्लाई) शुरू की जा चुकी है।
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बाग और रिंगनोद परियोजना: फिलहाल ट्रायल रन (परीक्षण) पर हैं।
जब कलेक्टर ने पानी के सोर्स के बारे में पूछा, तो अधिकारियों ने बताया कि इन परियोजनाओं के लिए माही डैम (बांध) से पानी लाया जा रहा है। कलेक्टर ने साफ किया कि पेयजल का डिस्ट्रीब्यूशन पूरी तरह से ग्रामीणों की जरूरत और डिमांड के हिसाब से ही होना चाहिए।
संबल से लेकर पीएम आवास तक… हर योजना की खुली कुंडली
बैठक में केवल पानी ही नहीं, बल्कि गरीब और मजदूरों से जुड़ी योजनाओं का भी पूरा एक्स-रे किया गया। कलेक्टर ने श्रम विभाग की संबल योजना, अनुग्रह सहायता और प्रधानमंत्री मानधन योजना की प्रगति देखी। इसके अलावा लोकसेवा केंद्र, राज्य आजीविका मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, पंचायती राज, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) विभाग के कार्यों का भी कड़ा मूल्यांकन किया गया।
बैठक में ये रहे मौजूद : इस हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक चौधरी सहित तमाम विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी अपनी फाइलों के साथ मौजूद थे।

