PHE कर्मचारियों की चेतावनी- ’30 साल पुराना फ्लॉप प्रयोग’ फिर दोहरा रही सरकार, नहीं माने तो होगा आर-पार का आंदोलन
धार। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के सरकारी अमले को लेकर प्रदेश सरकार एक ऐसा बड़ा दांव खेलने जा रही है, जिसने पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया है। शासन स्तर पर गुपचुप चल रही इस तैयारी की भनक लगते ही धार जिले के मोहनखेड़ा में पीएचई के तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों की एक आपातकालीन ‘संयुक्त बैठक’ बुलाई गई। अमले में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि सालों से गांवों की प्यास बुझाने वाले इस तकनीकी विभाग को खत्म कर, इसके कर्मचारियों को दूसरे विभागों में ‘धकेलने’ की तैयारी की जा रही है।
क्या है पूरा मामला (जिसने उड़ाई कर्मचारियों की नींद)
बीते दिनों भोपाल में एक हाई-प्रोफाइल मीटिंग हुई थी। इस बैठक में एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए यह एजेंडा तय किया गया कि:
- ग्रामीण क्षेत्र के अमले को: पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में विलय या प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाए।
- शहरी क्षेत्र के अमले को: नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सुपुर्द कर दिया जाए।
इस खबर के 16 मई को अखबारों में सुर्खियां बनते ही विभाग के भीतर ‘असंतोष की चिंगारी’ सुलग गई। कर्मचारियों का कहना है कि अचानक लिए जा रहे इस फैसले से उनके भविष्य और हितों पर सीधी तलवार लटक गई है।
1996 का वो ‘फ्लॉप शो’ भूल गई सरकार
बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारी नेताओं ने इतिहास के पन्ने पलटते हुए सरकार को पुरानी गलती याद दिलाई।
कर्मचारियों का तर्क: “साल 1996-1997 में भी सरकार ने यही प्रयोग किया था। तब हैंडपंपों के संधारण (Maintenance) का काम पंचायतों को सौंप दिया गया था। नतीजा यह हुआ कि पूरा सिस्टम ढह गया, ग्रामीण इलाकों में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मच गई और लोग बूंद-बूंद को तरस गए थे। आखिरकार सरकार को यह काम दोबारा PHE विभाग को ही सौंपना पड़ा था। अब फिर वही इतिहास दोहराने की जिद क्यों?”
मुख्यमंत्री और मंत्री से गुहार, नहीं माने तो ‘आर-पार’ की जंग
मोहनखेड़ा की इस बैठक में संगठन ने साफ कर दिया है कि वे इस फैसले को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगे। रणनीति तैयार कर ली गई है:
- संगठन का विस्तार: सबसे पहले प्रदेश स्तर पर संगठन को मजबूत किया जाएगा।
- नेताओं से मुलाकात: विभागीय अधिकारी-कर्मचारी जल्द ही मुख्यमंत्री और पीएचई मंत्री संपतिया उइके से मुलाकात कर इस प्रस्ताव को रोकने का निवेदन करेंगे।
- आंदोलन की चेतावनी: अगर सरकार ने इस ‘विलय/प्रतिनियुक्ति’ के फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आने वाले दिनों में पूरे मध्य प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन और प्रदर्शन किया जाएगा।
जनसमाचार एमपी नोट : जल जीवन मिशन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को संभाल रहे पीएचई विभाग के अमले की यह नाराजगी आने वाले दिनों में सरकार के लिए बड़ी सिरदर्दी बन सकती है। देखना होगा कि सरकार इस विरोध के बाद अपने कदम पीछे खींचती है या टकराव की स्थिति बनती है।
