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धार्मिक पर्यटन स्थलों पर खुलेंगे 12 आयुष वेलनेस सेंटर्स, बुजुर्गों के लिए चलेगा ‘वयोमित्र’ अभियान

MP को मिलेगी ‘हेल्थ टूरिज्म’ की सौगात

भोपाल। मध्यप्रदेश में अब धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विश्वस्तरीय आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा का लाभ भी मिल सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में प्रदेश के 12 प्रमुख पर्यटन केंद्रों पर ‘आयुष हेल्थ एंड वेलनेस केंद्र’ स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही, राज्य सरकार बुजुर्गों की घर बैठे देखभाल के लिए ‘वयोमित्र’ और असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों के जीवन को सुगम बनाने के लिए ‘कारूण्य’ जैसे संवेदनशील कार्यक्रम भी बड़े पैमाने पर शुरू करने जा रही है।

इन 12 पर्यटन स्थलों पर कायाकल्प की तैयारी

मप्र पर्यटन विभाग और आयुष विभाग के बीच हुए एमओयू के तहत जिन 12 स्थानों पर ये वेलनेस सेंटर्स स्थापित किए जा रहे हैं, उनमें शामिल हैं:

  • विश्व धरोहर: खजुराहो (छतरपुर)

  • धार्मिक केंद्र: ओंकारेश्वर (खण्डवा), चित्रकूट (सतना), उज्जैन, दतिया, मंदसौर और आगर-मालवा।

  • ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थल: चंदेरी (अशोकनगर), पचमढ़ी (नर्मदापुरम), ओरछा (निवाड़ी), आलीराजपुर और सिंगरौली।

“बिना सर्जरी इलाज और सामान्य प्रसव के उदाहरण प्रेरणादायी” बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, “एलोपैथी के साथ हमारी प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देना जरूरी है। उज्जैन सहित मप्र के कई स्थानों पर बिना शल्य चिकित्सा (सर्जरी) के गंभीर रोगियों को ठीक करने और सामान्य प्रसव कराने वाले सफल आयुर्वेद अस्पताल संचालित हैं। ऐसे प्रामाणिक आयुर्वेदाचार्यों की सेवाओं का लाभ जन-जन तक पहुंचना चाहिए।”

हर जिला अस्पताल में होगी अलग ‘आयुष विंग’ और पंचकर्म यूनिट

मुख्यमंत्री ने ‘स्वास्थ्य नीति-2017’ और ‘विजन-2047’ के तहत विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं:

  • 22 जिलों में आयुष विंग: प्रदेश के 22 जिला एलोपैथी अस्पतालों में अलग से आयुष विंग बनाई जा रही है, जहाँ पंचकर्म यूनिट की विशेष सुविधा होगी।

  • 5 नए आयुर्वेदिक कॉलेज व अस्पताल: नर्मदापुरम, मुरैना, शहडोल, बालाघाट, सागर, झाबुआ और शुजालपुर (शाजापुर) में नए सरकारी आयुर्वेदिक महाविद्यालयों के निर्माण को मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा 12 जिलों में 50-बिस्तर की क्षमता वाले आयुष अस्पताल शुरू हो रहे हैं।

  • भोपाल में इंफ्रास्ट्रक्चर: राजधानी के पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कॉलेज परिसर में ₹29 करोड़ की लागत से नया प्रशासनिक और अकादमिक भवन तैयार हो रहा है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आयुष विभाग के ‘मिशन मोड’ लक्ष्य

विभाग का मुख्य रोडमैप और बजट प्रावधान:

  • फर्स्ट रेफेरल यूनिट (FRU): प्रदेश के सभी 9 आयुष महाविद्यालयों को FRU के रूप में अपग्रेड और विकसित किया जाएगा।

  • हिंदी में यूनानी पाठ्यक्रम: भाषाई सुगमता के लिए अब यूनानी चिकित्सा पद्धति की पढ़ाई हिंदी भाषा में भी उपलब्ध कराई जाएगी।

  • श्रमिकों को कैशलेस इलाज: श्रम विभाग के समन्वय से प्रदेश के 13 लाख पंजीकृत श्रमिक परिवारों को आयुष चिकित्सा के तहत कैशलेस इलाज की बड़ी सुविधा मिलेगी।

  • रिसर्च और नए केंद्र: बालाघाट में नए आयुष शोध केंद्र की शुरुआत होगी।

  • विशेष बजट अलॉटमेंट: ₹75 करोड़ के भारी-भरकम प्रावधान से आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना, एक प्राकृतिक एवं योग कॉलेज और दूरदराज के इलाकों के लिए 20 आयुष मोबाइल मेडिकल यूनिट (चलते-फिरते अस्पताल) शुरू किए जाएंगे।

बैठक में ये रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार, मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और प्रमुख सचिव आयुष शोभित जैन सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने जनजातीय बाहुल्य और सिकल सेल एनीमिया से प्रभावित जिलों में आयुर्वेद दवाओं के निर्बाध वितरण को भी सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

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