धार में मनचाही पोस्टिंग के बदले मांग रहा था 4 लाख
इंदौर। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस का डंडा लगातार चल रहा है। ताजा मामला इंदौर लोकायुक्त का है, जहां टीम ने फिल्मी स्टाइल में जाल बिछाकर खरगोन जिले के मंडलेश्वर शासकीय महाविद्यालय में पदस्थ एक असिस्टेंट प्रोफेसर को 50,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया है। आरोपी प्रोफेसर महोदय एक महिला सहायक प्राध्यापक की मनचाही जगह पोस्टिंग कराने के नाम पर ‘कमीशन’ वसूल रहे थे।
लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख एवं उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज कुमार सिंह के निर्देशन में इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
मंदसौर से धार ट्रांसफर मैंने कराया, लाओ 4 लाख रुपए
यह पूरा मामला एक ट्रांसफर और पोस्टिंग के खेल से जुड़ा है। इंदौर के मानपुर (यशवंत नगर) निवासी आवेदक मनोज वास्केल ने लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय के सामने हाजिर होकर एक शिकायती आवेदन दिया था। मनोज ने बताया कि उनकी पत्नी उर्मिला वास्केल का चयन एमपीपीएससी के माध्यम से सहायक प्राध्यापक (असिस्टेंट प्रोफेसर) के पद पर हुआ था। उनकी पहली पोस्टिंग दलौदा (मंदसौर) में हुई थी, लेकिन बाद में उनका तबादला धार के शासकीय कॉलेज में हो गया, जो उनके घर (मानपुर) के काफी नजदीक है।
बस इसी बात का फायदा उठाकर आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर आत्माराम सोलंकी (पिता सिरदार सोलंकी) ने पीड़ित परिवार को धमकाना और ठगना शुरू कर दिया। आरोपी सोलंकी का दावा था कि मंदसौर से धार ट्रांसफर उसने ही अपनी सेटिंग से करवाया है, इसलिए उसे चार लाख रुपए की रिश्वत चाहिए। आरोपी प्रोफेसर इस सौदे में से एक लाख रुपए पहले ही डकार चुका था और बाकी के 3 लाख रुपए के लिए लगातार दबाव बना रहा था।
ढाबे पर तय हुआ सौदा, लोकायुक्त ने बिछाया जाल
लोकायुक्त पुलिस ने जब शिकायत का वेरिफिकेशन (सत्यापन) कराया, तो मामला बिल्कुल सही पाया गया। बातचीत के दौरान 27 मई 2026 को आरोपी प्रोफेसर 3 लाख रुपए की बकाया राशि में से 50,000 रुपए की अगली किश्त लेने के लिए राजी हुआ।
रिश्वत की रकम लेने के लिए आरोपी आत्माराम सोलंकी ने आवेदक मनोज को धामनोद बाईपास स्थित ‘मधुबन ढाबे’ पर बुलाया। लेकिन आरोपी इस बात से बिल्कुल अनजान था कि लोकायुक्त की टीम पहले से ही सादे कपड़ों में ढाबे के आसपास जाल बिछाकर उसका इंतजार कर रही थी।
रंगे हाथों गिरफ्तारी: जैसे ही पीड़ित मनोज वास्केल ने प्रोफेसर आत्माराम सोलंकी को 50,000 रुपए की नकदी थमाई, वैसे ही इशारा मिलते ही लोकायुक्त की ट्रैप टीम ने आरोपी को रंगे हाथों दबोच लिया। नोट पकड़ते ही प्रोफेसर के हाथ ‘गुलाबी’ (केमिकल टेस्ट में) हो गए।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज
मौके पर ही लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
सफल ट्रैप टीम में ये रहे शामिल:
इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने वाली ट्रैप टीम में उप पुलिस अधीक्षक सुनील तालान, कार्यवाहक प्रधान आरक्षक विवेक मिश्रा, आरक्षक विजय कुमार, कमलेश परिहार, रामेश्वर निगवाल, आशीष नायडू और प्रभात मोरे शामिल रहे।
लोकायुक्त की आमजन से अपील
लोकायुक्त संगठन ने साफ किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी। यदि कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी आपसे किसी काम के एवज में रिश्वत की मांग करता है, तो डरें नहीं। आप सीधे लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में आकर या उनके आधिकारिक दूरभाष नंबरों पर संपर्क कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आपकी पहचान गुप्त रखी जाएगी और भ्रष्टाचारियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।
