प्रशासन के प्रस्ताव को मुस्लिम समाज ने बताया कोर्ट के आदेश का उल्लंघन
धार। धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद जिला प्रशासन और मुस्लिम समुदाय के बीच हुई बैठक बेनतीजा साबित हुई है। प्रशासन द्वारा नमाज के लिए प्रस्तावित की गई नई जगह को मुस्लिम समाज ने न्यायालय के आदेशों की गलत व्याख्या बताते हुए पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया है।
शुक्रवार को धार जिला प्रशासन ने एडीएम संजीव केशव पांडे की अगुवाई में हिंदू संगठनों और मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ अलग-अलग समय पर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। इस बैठक में प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए मुस्लिम समुदाय को भोजशाला परिसर के 300 मीटर के दायरे से बाहर, ग्राम मालीवाड़ा में 40 पीर के पास सर्वे नंबर 664 की जमीन पर प्रति शुक्रवार दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे तक (अंतिम निर्णय आने तक) नमाज अदा करने का प्रस्ताव दिया।
मुस्लिम समाज के वरिष्ठों और मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के सदर अब्दुल समद ने इस प्रस्ताव पर असहमति जताते हुए इसे खारिज कर दिया। उनका तर्क है कि प्रशासन द्वारा सुझाई गई यह जगह भोजशाला परिसर से लगभग 2 किलोमीटर दूर है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा है कि नमाज के लिए भोजशाला से सटी हुई या उसके बिल्कुल नजदीक की जगह उपलब्ध कराई जाए। मुस्लिम पक्ष ने परिसर के मुख्य पूर्वी गेट के आंगन (दरगाह गेट के पास) नमाज पढ़ने की मांग की थी, जहां वज़ूखाना और मेंबर जैसी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं, लेकिन प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर इसे नामंजूर कर दिया।
मुस्लिम समुदाय ने कहा है कि यदि उन्हें भोजशाला के नजदीक नमाज़ के लिए जगह नहीं दी गई, तो वे अगले शुक्रवार को प्रशासन द्वारा दी गई नई जगह पर नमाज नहीं पढ़ेंगे। इस मामले की नियमित सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 5 अगस्त की तारीख तय की है। हालांकि, मुस्लिम पक्ष के नेताओं और याचिकाकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे 5 अगस्त से पहले ही प्रशासन के इस फैसले और आदेश के इंटरप्रिटेशन (व्याख्या) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आवेदन देकर इसे कानूनी चुनौती देंगे।
