शांति और धार्मिक आस्था की रक्षा के लिए सकल पंच रजक समाज ने उठाई स्पष्ट नीति की मांग
धार। धार शहर की धार्मिक संवेदनशीलता और ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में शांति बनाए रखने को लेकर सामाजिक सतर्कता बढ़ गई है। हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं और आस्था को ध्यान में रखते हुए, शहर के सकल पंच रजक समाज ने प्रशासन से भोजशाला में नमाज़ न करवाए जाने और अदालत के आदेशों के सख्त पालन की मांग की है।
भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक गतिविधियों को लेकर सकल पंच रजक समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। अध्यक्ष कैलाश पिपलोदिया के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि परिसर में आवागमन और धार्मिक गतिविधियों की व्यवस्था न्यायालय के आदेशों के अनुसार स्पष्ट रूप से तय की जाए।
इस अवसर पर गोपाल मालवीय, सुरेश जलोदिया, भगवानदास मालवीय, गंगासिंग सिसोदिया, रघुनाथ आमोदिया, डॉ. यतीन्द्र मालवीय, कैलाश बारिया, प्रमोद गेहलोत, कृष्णा मालवीय, हेमंत मालवीय, दिनेश पिपलोदिया, हंसराज सोनवानिया, नितिन मालवीय, मनीष सोनवानिया, गुंजन सोनवानिया, प्रतीक पिपलोदिया और पीयूष मालवीय सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।
ज्ञापन के प्रमुख बिंदु
समाज द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में निम्नलिखित बातों पर विशेष जोर दिया गया:
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अदालती आदेशों का पालन: माननीय न्यायालयों द्वारा समय-समय पर दिए गए निर्देशों के अनुरूप ही भोजशाला की व्यवस्था संचालित की जाए।
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बाधा रहित पूजा: हिंदू समाज की पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो।
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सौहार्द और कानून-व्यवस्था: धार की संवेदनशीलता को देखते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे दोनों समुदायों के बीच तनाव या विवाद की स्थिति न बने और शहर में शांति व सामाजिक सौहार्द बना रहे।
मीडिया प्रभारी हंसराज सोनवानीया द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, समाज ने प्रशासन से आग्रह किया है कि भविष्य में किसी भी अप्रिय स्थिति या विवाद से बचने के लिए एक स्पष्ट, स्थायी और शांतिपूर्ण व्यवस्था लागू की जाए। यदि प्रशासन न्यायालयीन आदेशों के तहत एक पारदर्शी नीति तय करता है, तो इससे न केवल कानून-व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि शहर में सामाजिक ताना-बाना और शांति भी बनी रहेगी।
