अब मुलाकात के साथ मिलेगा न्याय, धार जिला जेल में ‘लीगल एड हेल्प डेस्क’ शुरू
धार। अक्सर अपनों से मिलने जेल पहुंचने वाले कैदियों के परिजनों की आंखों में बेबसी और चेहरों पर कानूनी दांव-पेंचों का खौफ साफ नजर आता है। वकील की भारी-भरकम फीस, कोर्ट-कचहरी के चक्कर और केस की सही स्थिति का पता न होना, उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ देता है। इसी दर्द को समझते हुए धार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने एक बेहद संवेदनशील और अनूठी पहल की है।
मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशों पर जिला जेल धार के मुलाकात परिसर में ‘लीगल एड हेल्प डेस्क’ का शंखनाद किया गया है। इसका विधिवत शुभारंभ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रदीप सोनी द्वारा बंदी परिजनों की मौजूदगी में किया गया।
एक ही काउंटर पर दूर होंगी सारी टेंशन
इस दूरदर्शी पहल का सीधा मकसद बंदियों के परिवारों को कोर्ट-कचहरी के भटकाव और दलालों के चंगुल से बचाना है। अब जेल में बंद अपनों से मुलाकात करने आने वाले परिजनों को इस हेल्प डेस्क के जरिए निम्नलिखित जानकारियां पूरी तरह निःशुल्क मिलेंगी:
-
केस का लाइव स्टेटस: उनके परिजन का केस अभी किस स्टेज पर है।
-
जमानत और अपील: जमानत की प्रक्रिया और ऊपरी अदालत में अपील की स्थिति।
-
पुनर्विचार याचिका व पेशी: अगली तारीख और कानूनी विकल्पों की प्रामाणिक जानकारी।

“पैसों की कमी से नहीं रुकेगा न्याय”
शुभारंभ के बाद सचिव श्री प्रदीप सोनी ने वहां मौजूद बंदी परिजनों से सीधे जमीन पर बैठकर बात की और उनके कानूनी हक समझाए। उन्होंने भावुक और परेशान परिवारों को ढांढस बंधाते हुए एक बड़ा भरोसा दिया।
“कोई भी व्यक्ति सिर्फ इसलिए न्याय से वंचित नहीं रहना चाहिए क्योंकि उसके पास वकील के पैसे नहीं हैं या वह कानून की बारीकियां नहीं जानता। यह हेल्प डेस्क हर जरूरतमंद तक त्वरित और पारदर्शी न्याय पहुंचाने की दिशा में हमारा एक ठोस कदम है।” — प्रदीप सोनी, सचिव (न्यायिक मजिस्ट्रेट), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण
जेल महकमा रहा मुस्तैद
इस ऐतिहासिक और कल्याणकारी शुरुआत के मौके पर जिला जेल के अधीक्षक आर.आर. डांगी, पैरालीगल वॉलेंटियर (पराविधिक स्वयंसेवक) शिवसिंह तोमर एवं शहनाज बी सहित जेल विभाग का पूरा स्टाफ मौजूद रहा। इस नई व्यवस्था से पहले ही दिन दर्जनों परिवारों के चेहरों पर राहत की लकीरें साफ देखी गईं।
