‘सार्थक ऐप’ के विरोध में उतरा कृषि विस्तार अधिकारी संघ, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
धार। मैदानी चुनौतियों और अत्यधिक कार्यभार के बीच ‘सार्थक ऐप’ के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने की अनिवार्यता अब कृषि विस्तार अधिकारियों के लिए गले की फांस बनती जा रही है। इस व्यवस्था के विरोध में आज कृषि विस्तार अधिकारी संघ, जिला शाखा धार द्वारा भोपाल संगठन के आव्हान पर माननीय मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें इस अनिवार्य प्रणाली से मुक्त करने की पुरजोर मांग की गई है।
बुधवार को धार जिला मुख्यालय पर एकत्रित होकर कृषि विस्तार अधिकारी संघ के पदाधिकारियों ने अपनी व्यावहारिक समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा। जिलाध्यक्ष पारस बेनल के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में बताया गया कि कृषि विभाग में महिला कर्मचारियों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन मैदानी स्तर पर उनके ठहरने और अन्य जरूरी सुविधाओं का भारी अभाव है। इसके साथ ही एक-एक अधिकारी के पास वर्तमान में 5 से 6 कृषि केंद्रों और लगभग 35 से 40 गांवों का प्रभार है। ऐसे में रोज अलग-अलग गांवों का दौरा कर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने और सरकारी योजनाओं को लागू करने के बीच ऐप पर हाजिरी लगाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हो पा रहा है।
संघ का स्पष्ट कहना है कि इस अनुपयुक्त तकनीकी व्यवस्था के कारण उनका मैदानी कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। यदि शासन द्वारा कृषि विस्तार अधिकारियों की इन वास्तविक समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर उन्हें ‘सार्थक ऐप’ से मुक्ति नहीं दी गई, तो आने वाले दिनों में किसानों के हित में किए जाने वाले शासकीय कार्यों की गति धीमी हो सकती है। अब देखना होगा कि शासन इस जमीनी हकीकत को देखते हुए क्या कदम उठाता है।
