कलेक्टर मीना ने बच्चे को पिलाई विटामिन-ए की खुराक
धार। जिले में बाल स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने और कुपोषण मुक्त बचपन के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से कलेक्टर राजीव रंजन मीना द्वारा ‘दस्तक सह स्टॉप डायरिया अभियान 2026’ का विधिवत शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर कलेक्टर स्वयं जिला चिकित्सालय स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) पहुंचे। वहां उन्होंने भर्ती बच्चों की माताओं को ओआरएस पैकेट, जिंक एवं अन्य आवश्यक दवाइयां प्रदान कीं। उन्होंने माताओं को मौसमी बीमारियों से बचाव हेतु दवाइयों के सही उपयोग और उनकी निर्धारित मात्रा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही, बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें विटामिन-ए की खुराक भी पिलाई।
14 जुलाई से 31 अगस्त तक चलेगा महाअभियान
यह विशेष स्वास्थ्य अभियान 14 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक पूरे जिले में संचालित किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत 0 से 5 वर्ष तक के 2,79,229 पात्र बच्चों के घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
क्या है अभियान का लक्ष्य?
- मुख्य उद्देश्य : दस्त, निमोनिया, कुपोषण एवं अन्य बाल्यकालीन बीमारियों से होने वाली मृत्यु दर को शून्य पर लाना।
- मैदानी मोर्चा : स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त दल (एएनएम, आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता) द्वारा घर-घर जाकर बच्चों का गहन स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।
- NRC में भर्ती : कुपोषण के विरुद्ध प्रभावी प्रहार हेतु चिन्हित गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRC) में भर्ती कराया जाएगा, जहां उनके स्वास्थ्य सुधार और वजन वृद्धि की नियमित निगरानी होगी।
- त्वरित उपचार : बीमारी पाए जाने पर बच्चों को त्वरित उपचार और आवश्यकतानुसार उच्च स्वास्थ्य केंद्रों के लिए रेफरल की सुविधा दी जाएगी।
कलेक्टर के सख्त निर्देश: लापरवाही बर्दाश्त नहीं
कलेक्टर मीना ने स्वास्थ्य विभाग को अभियान के दौरान गुणवत्तापूर्ण भ्रमण सुनिश्चित करने तथा किसी भी पात्र बच्चे को न छोड़ने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को अभियान की दैनिक मॉनिटरिंग करने और पोर्टल पर डेटा की समयबद्ध एंट्री सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया है।
कलेक्टर की अपील : “जिले के समस्त पालक दस्तक दल को अपने बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी सही और सटीक जानकारी प्रदान करें। इस अभियान में पूर्ण सहयोग दें, ताकि हमारे बच्चों को एक सुरक्षित, सुपोषित और स्वस्थ भविष्य मिल सके।”

