धार। न्यायालय में सच को छिपाना और झूठे दस्तावेजों के सहारे जमीन हासिल करने की साजिश रचना अब चार लोगों को भारी पड़ गया है। अदालत में जारी एक सिविल केस की सुनवाई के दौरान जब फर्जी वसीयत का सच उजागर हुआ, तो सिविल जज ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस को तत्काल आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश दे दिए।
जमीन विवाद के एक दीवानी मामले (RCS A 34/2022) में झूठी और कूट रचित (जाली) वसीयत बनाकर अदालत में पेश करने का मामला सामने आया है। यह मामला धार जिले के धरमपुरी स्थित द्वितीय सिविल जज सीनियर डिवीजन विवेक जैन की अदालत और धरमपुरी पुलिस थाने से संबंधित है।
वसीयत 19 दिसंबर 2019 की बताई गई थी, जिसे कोर्ट में चल रहे केस के दौरान पेश किया गया था। अदालत ने इस मामले में 28 जुलाई 2026 को फैसला सुनाते हुए FIR दर्ज कराने का आदेश दिया, जिसके आधार पर धरमपुरी थाने में 6 अगस्त गुरुवार को मामला दर्ज किया गया। जिसमें आरोपी हिम्मतसिंह, नरेन्द्रसिंह (दोनों पिता शेरसिंह), धर्मेन्द्रसिंह (पिता बागसिंह) और शिवराजसिंह (पिता भारतसिंह) हैं, जो सभी लुन्हेराखुर्द के निवासी हैं।
अदालत में कैसे खुली साज़िश की पोल
अदालत में सुनवाई के दौरान गायत्रीबाई आदि द्वारा दाखिल केस में प्रतिवादी नरेन्द्रसिंह ने दावा किया था कि उसके पिता शेरसिंह ने अपनी इच्छा से 19 दिसंबर 2019 को उसके नाम वसीयत निष्पादित की थी। हालांकि, न्यायालय में बयान दर्ज कराने के दौरान नरेन्द्रसिंह ने यह स्वीकार कर लिया कि यह वसीयत सिविल केस दर्ज होने के बाद हिम्मतसिंह बनवाकर लाया था। हिम्मतसिंह ने ही उससे कहा था कि इस वसीयत को कोर्ट में पेश करने पर जमीन उसे मिल जाएगी। इसके बाद नरेन्द्र ने स्वयं अपने रिश्तेदार धर्मेन्द्र और शिवराज से इस पर हस्ताक्षर करवाए थे।
अदालत ने पाया कि कूट रचित दस्तावेज का यह षड्यंत्र न्यायालय परिसर के बाहर रचा गया था, इसलिए इसमें सामान्य पुलिस FIR दर्ज कराई जा सकती है।
अदालत के आदेश पर धरमपुरी पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2), 336(3), 338 और 340(2) के तहत धोखाधड़ी और साजिश रचने का अपराध पंजीबद्ध कर लिया है।
अदालत ने यह स्पष्ट निर्देश भी दिए हैं कि पुलिस विवेचना के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति, स्टाम्प वेंडर, नोटरी या अधिवक्ता की संलिप्तता पाई जाती है, तो उन्हें भी इस मामले में आरोपी बनाया जाए। पुलिस की इस सख्त कार्रवाई से फर्जी दस्तावेज बनाकर जमीनों पर कब्जा करने या अदालत को गुमराह करने की कोशिश करने वालों पर कड़ा संदेश जाएगा।
