AI से बनाए फर्जी दस्तावेज, 3 शातिर गिरफ्तार
बैंक नीलामी और सस्ते प्लॉट का झांसा देकर करते थे ठगी
इंदौर। बैंक नीलामी के नाम पर कम दामों में सपनों का आशियाना तलाश रहे लोगों को ठगने वाले एक हाईटेक गिरोह का इंदौर पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। आधुनिक तकनीक और नकली सरकारी मुहरों के दम पर यह गिरोह लोन डिफॉल्ट वाली संपत्तियों के फर्जी कागजात तैयार कर लोगों से लाखों की ठगी कर रहा था।
इंदौर के विजय नगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महू निवासी तीन जालसाजों संतोष राजपूत, मनोहर उर्फ धर्मेंद्र और आदित्य (पिता करुणाकर थम्मो) को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बैंक ऑक्शन और लोन डिफॉल्ट वाले मकानों व भूखंडों को बाजार भाव से बेहद सस्ते दामों पर दिलाने का झांसा देकर लोगों को अपना शिकार बनाता था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए खुद को मूल दस्तावेजों का धारक बताते थे और उन्हें फर्जी अलॉटमेंट लेटर व रजिस्ट्री दिखाते थे। जांच में सामने आया कि गिरोह ने एआई तकनीक की मदद से हूबहू दिखने वाले फर्जी सरकारी व वित्तीय दस्तावेज तैयार किए थे। इसके अलावा, विभिन्न सरकारी दफ्तरों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों की जाली मुहरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लगभग 8.25 लाख से 8.5 लाख रुपए मूल्य के डिमांड ड्राफ्ट, जाली दस्तावेज और नकली सील बरामद की हैं।
एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318, 336, 338 और 340 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें रिमांड पर लिया गया है। पुलिस अब इस पहलू की जांच कर रही है कि इस रैकेट में अन्य कौन-कौन से लोग शामिल हैं। इस खुलासे के बाद आने वाले दिनों में कई और पीड़ितों के सामने आने की संभावना है, जिनकी शिकायतों के आधार पर गिरोह के खिलाफ जांच का दायरा और कानूनी कार्रवाई और अधिक बढ़ सकती है।
