19 साल से मिल रही थीं शिकायतें, अब कमिश्नर ने किया सस्पेंड
धार। धार के सांदीपनी स्कूल के प्रभारी प्राचार्य डॉ. स्मृतिरत्न मिश्र की ‘करतूतों’ का घड़ा आखिरकार फूट ही गया। महिला कर्मचारियों और शिक्षिकाओं के साथ बदसलूकी, अश्लील इशारे और शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोपों में घिरे प्राचार्य को इंदौर संभाग के कमिश्नर डॉ. सुदाम खाड़े ने तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय धार तय किया गया है।
अखबारों में खबर छपने के बाद कलेक्टर धार ने एक जिला स्तरीय जांच दल गठित किया था, जिसकी रिपोर्ट आते ही प्रशासन ने यह बड़ी कार्रवाई की है।
जांच रिपोर्ट में रोंगटे खड़े करने वाले खुलासे
जांच दल के सामने जो शिकायतें और बयान आए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. स्मृतिरत्न मिश्र पर महिला कर्मचारियों ने ये गंभीर आरोप लगाए हैं:
- गलत नीयत से देखना और अश्लील इशारे करना।
- जबरन हाथ पकड़ना और शरीर को छूने (बैड टच) की कोशिश।
- गलत काम करने के लिए दबाव बनाना और जबरदस्ती अपने धार स्थित निवास पर बुलाना।
कमिश्नर के आदेश में साफ कहा गया है कि जांच दल ने पीड़ित महिला कर्मचारियों के बयान लेकर इन सभी गंभीर आरोपों की पुष्टि की है।
’सुधरने का नाम नहीं’: 2007 से यानी 19 साल से आ रही थीं शिकायतें
हैरानी की बात यह है कि प्राचार्य मिश्र की यह कोई पहली करतूत नहीं थी। आदेश पत्र के मुताबिक, मिश्र के खिलाफ वर्ष 2007 से लेकर अब तक (2026) लगातार इसी तरह की घिनौनी और समान प्रवृत्ति की शिकायतें महिला शिक्षकों द्वारा की जाती रही हैं। लेकिन हर बार वे बच निकलते रहे।
मानव अधिकार आयोग भी लगा चुका है फटकार
इससे पहले मानवाधिकार आयोग, भोपाल द्वारा की गई एक जांच में भी डॉ. मिश्र को कार्यस्थल पर महिला शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का दोषी पाया गया था। इसके बाद 30 मई 2018 को इंदौर कमिश्नर ने उन्हें सख्त हिदायत देते हुए ‘परिनिन्दा शास्ति’ (कड़ी चेतावनी/सेंसर) की सजा भी दी थी, लेकिन उनकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा।
पहले छिनी मलाईदार कुर्सी, फिर हुए सस्पेंड
शिकायतों के बाद प्रशासन ने पहले मिश्र की प्रतिनियुक्ति समाप्त की। वे विकासखंड स्रोत केंद्र समन्वयक (BRCC), जनपद शिक्षा केंद्र तिरला (धार) के मलाईदार पद पर पदस्थ थे, जहां उनका काम भी असंतोषजनक पाया गया। उन्हें वहां से हटाकर उनके मूल विभाग (शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, केसुर) में व्याख्याता के पद पर भेजा गया था।
लेकिन, अब कमिश्नर डॉ. सुदाम खाड़े ने उनके इस कृत्य को म.प्र. सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के सख्त खिलाफ मानते हुए उन्हें सीधे सस्पेंड कर दिया है। सस्पेंशन के दौरान उन्हें सिर्फ जीवन निर्वाह भत्ता ही मिलेगा।

