कैबिनेट बैठक में नई ट्रांसफर पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार
प्रभारी मंत्रियों को मिलेगी जिले की कमान, सिफारिश नहीं चलेंगे ऑनलाइन आवेदन
भोपाल। मध्यप्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए आज का दिन ‘सुपर संडे’ जैसा साबित हो सकता है! लंबे समय से तबादलों पर लगे ‘लॉक’ की चाबी आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट बैठक में मिल सकती है। मंत्रालय के गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, आज सरकारी अमले के ट्रांसफर पर लगी रोक हटाई जा सकती है, जिसके बाद प्रदेश में ‘धड़ाधड़’ ऑनलाइन तबादलों का दौर शुरू हो जाएगा।
कैबिनेट में आएगा ‘पॉलिसी-2026’ का ड्राफ्ट
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने नई तबादला नीति-2026 का पूरा खाका तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय (CMO) को हरी झंडी के लिए भेज दिया है। आज होने जा रही कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो सालों से एक ही जगह जमे और मनचाही पोस्टिंग का इंतजार कर रहे कर्मचारियों का रास्ता साफ हो जाएगा।
ट्रांसफर के दो ‘पावर स्लॉट’: समझिए कैसे बदलेंगे जिले
राज्य सरकार इस बार तबादलों को दो बड़े स्तरों पर अमलीजामा पहनाने की तैयारी में है:
- पहला स्तर (लंबा कार्यकाल): ऐसे अधिकारी और कर्मचारी जो एक ही सीट या जिले में लंबे समय से कुंडली मारकर बैठे हैं, उन्हें नई जगह भेजा जाएगा।
- दूसरा स्तर (परफॉर्मेंस और शिकायतें): इस रडार पर वो अफसर होंगे जिनकी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं या जिनके खिलाफ शिकायतें पेंडिंग हैं। इसके साथ ही, अपनी मर्जी से ट्रांसफर चाहने वाले (स्वेच्छिक) कर्मचारियों को भी इस बार मौका मिलेगा।
अब सिफारिश नहीं, ‘ऑनलाइन’ चमकेगी किस्मत!
इस बार की ट्रांसफर पॉलिसी में सबसे बड़ा गेमचेंजर ‘पारदर्शिता’ को माना जा रहा है। अब मंत्रियों के चक्कर काटने के बजाय कर्मचारियों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
किसे कितना पावर
विभागीय मंत्री: एक जिले से दूसरे जिले (अंतर-जिला) में ट्रांसफर की कमान संभालेंगे।
प्रभारी मंत्री: जिले के भीतर (इंट्रा-जिला) होने वाले फेरबदल के सर्वेसर्वा होंगे।
कुछ स्पेशल और वीआईपी मामलों में आवेदन पहले सीधे विभाग प्रमुखों (HOD) के पास स्क्रीनिंग के लिए जाएंगे, जिसके बाद ही उन्हें मंत्रियों की टेबल पर पुट-अप किया जाएगा।
पिछले साल का ‘स्लैब फॉर्मूला’
बता दें कि पिछले साल 1 मई से तबादले शुरू हुए थे, जिसमें पहली बार सरकार ने 4 अलग-अलग स्लैब बनाकर ट्रांसफर का दायरा 2 से 3 फीसदी तक बढ़ा दिया था। इस बार देखना दिलचस्प होगा कि डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट कर्मचारियों को क्या नया सरप्राइज देती है!
