मप्र शिक्षक ट्रांसफर पॉलिसी 2026: ‘नो हाजिरी, नो ट्रांसफर’ का कड़ा नियम
भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से एक ही ढर्रे पर चल रही तबादला व्यवस्था में सरकार ने बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव कर दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2026 के लिए जारी नई स्थानांतरण नीति के तहत अब शिक्षकों के तबादलों में ‘सिफारिश’ और ‘मानवीय दखल’ का खेल पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
इस बार विभाग ने पूरी प्रक्रिया को न सिर्फ डिजिटल और पारदर्शी बनाया है, बल्कि देश में संभवतः पहली बार ‘100% बोर्ड रिजल्ट’ देने वाले गुरुजी और प्राचार्यों को ‘VIP’ यानी सर्वोच्च प्राथमिकता का दर्जा दिया है।
अब शानदार परफॉर्मेंस पर मिलेगा मनचाहा ट्रांसफर
नई नीति के तहत तबादलों के लिए जो ‘वरीयता क्रम’ तय किया गया है, उसमें सबसे पहला हक उन शिक्षकों और प्राचार्यों को दिया गया है जिनके स्कूल का कक्षा 10वीं का बोर्ड परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत (100%) रहा है। हालांकि, इसके लिए शर्त यह है कि परीक्षा में न्यूनतम 40 छात्र शामिल हुए हों। शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारने और अच्छा काम करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार का यह एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
जून में ही निपटेंगे सारे तबादले, देखें पूरा शेड्यूल
सत्र 2026-27 के लिए विभाग ने बेहद चुस्त समय-सारणी (टाईम-लाइन) जारी की है, ताकि नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले सभी शिक्षक अपनी नई पोस्टिंग पर पहुँच जाएं:
- 08 से 17 जून: प्रशासनिक तबादलों के लिए प्रस्तावों का रजिस्ट्रेशन।
- 18 जून: पोर्टल पर स्वैच्छिक (Voluntary) ट्रांसफर के लिए खाली पदों की लिस्ट जारी होगी।
- 19 से 23 जून: शिक्षक ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
- 28 से 30 जून: ट्रांसफर के अंतिम आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
- 30 जून से 06 जुलाई: पुरानी जगह से रिलीव होना और नई जगह जॉइन करना होगा।
- 01 से 07 जुलाई: ट्रांसफर से असंतुष्ट शिक्षक ऑनलाइन अपनी आपत्ति (अभ्यावेदन) दर्ज करा सकेंगे।
सब कुछ होगा ऑनलाइन
अब ट्रांसफर के लिए किसी नेता की सिफारिश या दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। स्कूल शिक्षा विभाग के एजुकेशन पोर्टल और विभागीय मोबाइल ऐप के जरिए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित होगी। सॉफ्टवेयर बिना किसी मानवीय दखल के रिक्त पदों और वरीयता के आधार पर सीधे शालाओं का ऑनलाइन आवंटन करेगा। खास बात यह है कि एक बार सूची जनरेट होने के बाद इसमें कोई भी बदलाव या संशोधन नहीं किया जा सकेगा।
अतिशेष’ शिक्षकों पर गिरेगी गाज
नीति में साफ किया गया है कि जिन स्कूलों में तय सेटअप से ज्यादा शिक्षक जमे हुए हैं, उन्हें ‘अतिशेष’ मानकर शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में भेजा जाएगा। जो शिक्षक सबसे लंबे समय से एक ही जगह जमे हैं, वे इस लिस्ट में सबसे ऊपर होंगे। इसके अलावा, स्वैच्छिक ट्रांसफर का फायदा केवल वही शिक्षक उठा पाएंगे, जिन्होंने शैक्षणिक सत्र 2025-26 में जनवरी से मार्च के बीच 90% नियमित ई-अटेंडेंस लगाई है। बिना ऑनलाइन हाजिरी वाले शिक्षक इस रेस से बाहर हो जाएंगे।
गंभीर बीमार और पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत
सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए गंभीर बीमारी (कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट, ओपन हार्ट सर्जरी आदि), दिव्यांगता, विधवा, परित्यक्ता और विधुर श्रेणी के आवेदकों को भी ट्रांसफर में उच्च प्राथमिकता दी है। वहीं, यदि किसी लोक सेवक के पति या पत्नी का निधन हुआ है, तो घटना के 2 वर्ष के भीतर उन्हें ट्रांसफर में ‘प्रथम वरीयता’ का लाभ मिलेगा।
इन कड़े नियमों का रखना होगा ध्यान
- 3 साल का लॉक-इन पीरियड: एक बार स्वैच्छिक ट्रांसफर लेने के बाद अगले 3 शैक्षणिक सत्रों तक विशेष परिस्थितियों को छोड़कर दोबारा विचार नहीं किया जाएगा।
- ग्रामीण क्षेत्रों में ही जाना होगा: यदि कोई शिक्षक अपने जिले या संभाग से बाहर ट्रांसफर चाहता है, तो उसे केवल ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में ही पदस्थापना मिलेगी।
- गलत जानकारी दी तो नपेंगे: बीमारी या अन्य किसी कोटे का फायदा उठाने के लिए पोर्टल पर गलत जानकारी दी, तो ट्रांसफर निरस्त होने के साथ-साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होगी।
- वेतन को लेकर सख्त नियम: ट्रांसफर आदेश के बाद पुरानी जगह से सैलरी निकालना वित्तीय अनियमितता माना जाएगा; नई जगह से ही वेतन आहरित होगा।
विभाग की इस नई नीति से उम्मीद जताई जा रही है कि ग्रामीण इलाकों के शिक्षक-विहीन स्कूलों को पर्याप्त शिक्षक मिलेंगे और प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
आदेश की पूर्ण जानकारी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे :
