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सरदारपुर अस्पताल में हंगामा : बीएमओ ने लगाया मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा का आरोप, दूसरे पक्ष का दावा- मांगी गई थी रिश्वत

बीएमओ के आवेदन पर सरदारपुर पुलिस ने तीनों पति, पत्नी और बेटी पर किया प्रकरण दर्ज

धार। जिले के सरदारपुर के सिविल अस्पताल में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया जब मुख्य खण्ड चिकित्सा अधिकारी (BMO) और वहां कार्यरत एक आउटसोर्स महिला कर्मचारी के परिवार के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की हो गई। यह मामला अब पूरी तरह से पुलिस थाने और प्रशासनिक गलियारों में पहुंच चुका है, जहाँ एक तरफ डॉक्टर ने अपनी सुरक्षा और शासकीय कार्य में बाधा की गुहार लगाई है, तो वहीं दूसरी तरफ कर्मचारी के परिवार ने बीएमओ पर पद के दुरुपयोग और अवैध वसूली के गंभीर आरोप मढ़े हैं।

यह घटना बुधवार की सुबह करीब 11:00 से 11:12 बजे के बीच सिविल अस्पताल सरदारपुर के विकासखण्ड कार्यक्रम प्रबंधक यूनिट कार्यालय में घटित हुई। मुख्य पक्षकारों में एक तरफ अस्पताल की बीएमओ डॉ. शीला मुजालदा हैं, और दूसरी तरफ अस्पताल में मल्टीटास्क (आउटसोर्स) पद पर पदस्थ कर्मचारी देविका सिंगार, उनकी माता ताराबाई सिंगार व पिता बगदीराम सिंगार हैं। घटना की शुरुआत तब हुई जब डॉ. शीला ने देविका को ओपीडी पर्ची के अलावा वार्ड का काम भी सीखने और करने को कहा, जिसके बाद कर्मचारी का परिवार बीएमओ के दफ्तर पहुंचा और दोनों पक्षों में विवाद हो गया।

बीएमओ डॉ. शीला मुजालदा का पक्ष (मामला नंबर 1)

डॉ. शीला मुजालदा ने सरदारपुर थाने में आवेदन देकर और जिलाधीश (कलेक्टर) सहित वरिष्ठ अधिकारियों को प्रतिलिपि भेजकर शिकायत दर्ज कराई है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने बगदीराम, ताराबाई और देविका सिंगार पर प्रकरण दर्ज कर लिया है।

डॉ. शीला का कहना है कि जब वे अपने कार्यालय में शासकीय कार्य कर रही थीं, तब तीनों आरोपी वहां आए। ताराबाई ने ऊंची आवाज में गाली-गलौज करते हुए उन्हें बाहर निकलने की धमकी दी। आवेदन के अनुसार, ताराबाई ऑफिस के अंदर घुस आईं और डॉ. शीला का गला पकड़ लिया, बाल और मंगलसूत्र खींचे तथा कुर्ता पकड़कर कुर्सी से दरवाजे तक घसीटकर ले गईं, जिससे उनके होंठ और गर्दन पर चोटें आई हैं।

घटना के दौरान मौजूद बीपीएम राजू सिंह गडरिया, अकाउंटेंट लालसिंह झानिया और डाटा एंट्री ऑपरेटर शोभाराम मावी ने बीच-बचाव कर उन्हें छुड़वाया। जाते-जाते आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। साथ ही कर्मचारी देविका ने ओपीडी के अलावा अन्य काम करने से मना कर दिया।

कर्मचारी की माता ताराबाई सिंगार का पक्ष (मामला नंबर 2)

दूसरी ओर, प्रार्थीया ताराबाई पति बगदीराम सिंगार ने भी थाना प्रभारी, कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर बीएमओ पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए हैं।

ताराबाई का आरोप है कि बीएमओ डॉ. शीला मुजालदा उनकी बेटी देविका को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही हैं। वे देविका से कहती हैं कि “तुम जिले से सीधे आदेश लाई हो, वहां कितने पैसे दिए हैं, इसलिए मुझे भी पैसे देने होंगे।” पैसे न देने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि बीएमओ द्वारा देविका पर उनके घर पर झाड़ू-पोछा, बर्तन साफ करने जैसे निजी काम करने का दबाव बनाया जाता था।

ताराबाई के अनुसार, 24 जून बुधवार को वे अपनी बेटी के साथ बीएमओ से बात करने गई थीं। वहां बीएमओ ने उनसे पूछा कि “पैसे लेकर आई हो या नहीं?” जब देविका ने 5 हजार रुपए देने की बात कही, तो बीएमओ ने और पैसों की मांग की तथा इस्तीफा देने का दबाव बनाया। ताराबाई का आरोप है कि बीएमओ ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और शासकीय कार्य में बाधा का झूठा केस बनाकर जेल भिजवाने की धमकी दी।

इस घटना ने अस्पताल के प्रशासनिक माहौल को तनावपूर्ण कर दिया है। जहाँ एक तरफ अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने घटना के तुरंत बाद बीएमओ के समर्थन में खड़े होकर पुलिस कार्रवाई की मांग की है, वहीं दूसरी तरफ आउटसोर्स कर्मचारियों के शोषण और भ्रष्टाचार के आरोपों ने मामले को संवेदनशील बना दिया है। पुलिस ने फिलहाल बीएमओ की रिपोर्ट पर प्रकरण दर्ज कर लिया है, लेकिन दोनों पक्षों के दावों और संलग्न किए गए वीडियो साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच के बाद ही इस विवाद की असली सच्चाई सामने आ सकेगी। इस मामले का असर आगामी दिनों में अस्पताल की व्यवस्थाओं और स्थानीय प्रशासनिक जांच पर पड़ना तय है।

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