धार। पीथमपुर के सेक्टर 01 औद्योगिक क्षेत्र में एक फैक्ट्री के भीतर सुरक्षा मानकों और मशीन मेंटेनेंस में अनदेखी का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक कंपनी में काम करने वाले मजदूर के ऊपर भारी-भरकम मशीन का हिस्सा गिरने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस जांच में यह साफ हुआ है कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि मशीन की सर्विसिंग में बरती गई घोर लापरवाही का नतीजा थी।
यह घटना 4 जुलाई 2026 को शाम करीब 5:30 बजे पीथमपुर स्थित ‘हिमटेक्नो कंपनी’ में हुई। हादसे में मृतक की पहचान 49 वर्षीय भीमसेन (पिता कुल्लू राम सेन) के रूप में हुई है, जो घटना के वक्त पार्ट्स की डाई बनाने के साथ ही सवा 600 टन के हैमर (हथौड़े) से ग्राइंडिंग का काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक हैमर का स्टैंड मुड़ गया और पूरी मशीन भीमसेन के सिर पर जा गिरी, जिससे आई गंभीर चोटों के कारण उन्होंने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया।
पुलिस जांच में खुली मेंटेनेंस की पोल
घटना के बाद पुलिस ने मर्ग क्रमांक 69/26 धारा 194 BNSS के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शव का पंचनामा और पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया। मामले में जब पुलिस ने चश्मदीद गवाह और मृतक के साथी कर्मचारी अरुण कुमार गुप्ता के बयान दर्ज किए, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि हादसे से ठीक तीन दिन पहले, यानी 1 जुलाई 2026 को तीन कर्मचारियों—विनोद कुमार, फिटर सुरेश बोराडे और रामतिरथ ने इस मशीन की सर्विसिंग और मेंटेनेंस का काम किया था।
आरोपियों की लापरवाही
जांच में यह पाया गया कि इन तीनों ने मशीन की फिटिंग सही तरीके से नहीं की थी। सर्विसिंग में बरती गई इसी बड़ी लापरवाही के कारण काम के दौरान अचानक हैमर का स्टैंड मुड़ गया और यह जानलेवा हादसा हो गया। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 19 जुलाई रविवार को आरोपी विनोद कुमार, फिटर सुरेश बोराडे और रामतिरथ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
शुरुआती तौर पर मर्ग जांच के कारण इस मामले की एफआईआर में 15 दिन का विलंब हुआ, लेकिन अब पुलिस ने औपचारिक अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। धारा 106(1) BNS (लापरवाही से मौत) के तहत दर्ज इस मामले में अब पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी और कोर्ट में चालान पेश करने की तैयारी कर रही है। औद्योगिक क्षेत्रों में मशीनों की फिटनेस और मेंटेनेंस से जुड़ी यह लापरवाही आने वाले दिनों में कंपनियों के भीतर लेबर सेफ्टी और सुरक्षा ऑडिट के नियमों को और सख्त करने की वजह बन सकती है।
