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‘एक बंदी–एक पेड़’ पहल से महकेगी धार की जेलें : अमझेरा के जंगलों में छोड़ी गईं 3000 सीड्स बॉल, न्यायिक अधिकारियों ने सराहा

सब जेल सरदारपुर की अनूठी मुहिम, रिहा होने वाले बंदियों को मिल रहा ‘हरियाली’ के साथ नई जिंदगी का संदेश

धार। जिले के सरदारपुर की सब जेल ने कैदियों के सुधार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी मिसाल कायम की है। यहाँ संचालित ‘एक बंदी–एक पेड़’ अभियान और सीड्स बॉल निर्माण की पहल न केवल बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है, बल्कि अब इसे पूरे धार जिले की अन्य जेलों में भी लागू करने की तैयारी कर ली गई है। न्यायिक अधिकारियों के एक उच्च स्तरीय निरीक्षण ने इस मुहिम को पूरे जिले के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्वीकार किया है।

धार जिला एवं सत्र न्यायाधीश ममता जैन तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव प्रदीप कुमार सोनी द्वारा आज सब जेल सरदारपुर का औपचारिक निरीक्षण किया गया। इस विशेष दौरे के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने जेल परिसर में चल रहे “एक बंदी–एक पेड़ : जीवन की नई शुरुआत हरियाली के साथ” अभियान की प्रगति को देखा। इसके साथ ही बंदियों द्वारा तैयार की जा रही सीड्स बॉल निर्माण कार्य का गहन अवलोकन किया गया। इस दौरान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) नताशा शेख, जेएमएफसी धर्मकुमार, डीएलओ सिमोन सुलिया और सहायक जेल अधीक्षक संजय कुमार परमार सहित पूरा प्रशासनिक अमला मौजूद रहा।

3000 सीड्स बॉल का जंगलों में रोपण

निरीक्षण के बाद सभी न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों ने न केवल जेल परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण का संदेश दिया, बल्कि एक बड़ा कदम उठाते हुए लगभग 3000 सीड्स बॉल को अमझेरा के जंगलों में प्रसारित किया। यह कदम क्षेत्र में हरित आवरण को बढ़ाने और जंगलों के प्राकृतिक पुनरुद्धार की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

कैसे हुई इस अनूठी मुहिम की शुरुआत

इस पूरी योजना की परिकल्पना सब जेल सरदारपुर के प्रहरी एवं वारंट शाखा प्रभारी सियाराम लिमनपुरे द्वारा एक विस्तृत प्रस्ताव के माध्यम से तैयार की गई थी। इस विचार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव का मार्गदर्शन मिला, जिन्होंने जंगलों में बीजारोपण के लिए सीड्स बॉल बनाने का बहुमूल्य सुझाव दिया। सभी आवश्यक मंजूरियों के बाद 24 जून 2026 से इस अभियान का आधिकारिक आगाज किया गया, जिसमें वन विभाग सरदारपुर के रेंजर डॉ. शैलेन्द्र सोलंकी के सहयोग से शुरुआती 100 पौधे उपलब्ध कराए गए थे।

स्वतंत्रता दिवस पर रिहा बंदियों का सम्मान करेंगे

इस अभियान के तहत अब तक जेल से रिहा हुए कुल 58 बंदियों में से 53 को पौधे सौंपे गए हैं, जबकि जेल प्रशासन के 23 कर्मचारियों को भी इस हरित अभियान से जोड़ा गया है। रिहा हो चुके कई बंदियों ने अपने घरों पर पौधारोपण कर तस्वीरें व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की हैं। इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए आगामी 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इन रिहा बंदियों को आमंत्रित कर प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा, ताकि जेल में बंद अन्य कैदी भी प्रेरित हो सकें।

गूंजेगा अभियान का थीम गीत

इस मुहिम को आम जनमानस तक पहुंचाने और इसके संदेश को लोकप्रिय बनाने के लिए एक सांस्कृतिक पहल भी की जा रही है। प्रहरी विशाल राठौर की परिकल्पना पर सियाराम लिमनपुरे और विशाल राठौर ने मिलकर एक विशेष थीम गीत के बोल लिखे हैं। इस गीत को इन दोनों कर्मियों द्वारा संयुक्त रूप से आवाज दी जाएगी। वर्तमान में इस प्रेरणादायक गीत की रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, जिसे जल्द ही लॉन्च किया जाएगा।

सामूहिक सहभागिता से मिली बड़ी सफलता

इस अभियान की अभूतपूर्व सफलता के पीछे एक मजबूत सामूहिक प्रयास है। सहायक जेल अधीक्षक संजय कुमार परमार के नेतृत्व में समस्त जेल स्टाफ, वन विभाग, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और जेल में निरुद्ध बंदियों ने एक टीम के रूप में कार्य किया है। सभी विभागों के आपसी समन्वय से ही यह सुधारवादी कदम धरातल पर सफल हो सका है।

जेल सुधार की नई दिशा

सब जेल सरदारपुर से शुरू हुआ यह कारवां अब रुकने वाला नहीं है। माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश ममता जैन ने इस अभियान की भूरी-भूरी सराहना करते हुए सचिव को निर्देशित किया है कि इस मॉडल को धार जिले की अन्य सभी जेलों में भी प्राथमिकता के साथ लागू करने के प्रयास किए जाएं। आने वाले समय में यह पहल न केवल जिले की जेलों को हरा-भरा बनाएगी, बल्कि अपराधियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की एक बड़ी मिसाल बनकर उभरेगी।

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