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धार में भोजशाला के नजदीक नमाज विवाद पर प्रशासन और मुस्लिम पक्ष की बैठक बेनतीजा, मामला आज सुप्रीम कोर्ट में

  • सुप्रीम कोर्ट में आज (24 जुलाई) अहम सुनवाई

  • अदालत के फैसले को सर्वोपरि मानेगा मुस्लिम समाज

धार। मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर धार में भोजशाला के नजदीक और कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गर्मा गया है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के पालन में बुलाई गई प्रशासन और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों की बैठक गुरुवार रात बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। मुस्लिम पक्ष ने प्रशासन द्वारा दी गई वैकल्पिक जगह को काफी दूर बताते हुए उस पर गहरी आपत्ति जताई है और अपनी मूल जमीन पर ही नमाज अदा करने की मांग रखी है।

यह विवाद धार के ऐतिहासिक भोजशाला के पास और कमाल मौला मस्जिद परिसर में नमाज की व्यवस्था से जुड़ा है। गुरुवार रात बुलाई गई इस बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के बीच नमाज के स्थान को लेकर सहमति नहीं बन सकी। प्रशासन ने 40 पीर दरगाह (भोजशाला) से लगभग दो किलोमीटर दूर एक वैकल्पिक स्थान का प्रस्ताव रखा था। मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि इतनी दूरी के कारण वहां जाकर नमाज पढ़ना व्यावहारिक रूप से बेहद मुश्किल है और इसी अव्यवस्था के कारण पिछले शुक्रवार को नमाज अदा नहीं की जा सकी थी।

मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि अब्दुल समद का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट निर्देश था कि नमाज के लिए पास से पास स्थान की व्यवस्था की जाए, ताकि पिछले 700 वर्षों से चली आ रही परंपरा में बाधा न आए। उनका आरोप है कि बैठकों के दौर में ही कोर्ट द्वारा तय किया गया नमाज का समय (दोपहर 1:00 से 3:00 बजे) निकल जाता है, जिससे लगातार दो शुक्रवार (जुमा) से नमाज की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है। मुस्लिम पक्ष का साफ रुख है कि वे किसी अन्य खसरे या जमीन पर जाने के बजाय कमाल मौला मस्जिद परिसर में ही नमाज अदा करना चाहते हैं।

इस दूरी और व्यवस्था संबंधी आपत्तियों को लेकर हाजी मुनीर अहमद की याचिका के तहत सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किया गया है, जिस पर आज (24 जुलाई) सर्वोच्च न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई और बहस होनी है।

धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने बताया कि गुरुवार रात को प्रशासन और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की गई है। नमाज के लिए पहले जो भूमि उपलब्ध कराई थी, उसके साथ अन्य विकल्प भी सुझाएं है। समाजजनों को कहा है कि उस पर विचार करे और हमें अवगत कराए। प्रशासन द्वारा लगातार बैठक कर बातचीत की जा रही है।

मुस्लिम समाज ने स्पष्ट किया है कि वे 24 जुलाई को आने वाले सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोपरि मानेंगे और उसका पूरी तरह पालन करेंगे। आज होने वाली इस सुनवाई के फैसले से न केवल धार में शांति और व्यवस्था का भविष्य तय होगा, बल्कि नमाज के स्थान और सदियों पुरानी परंपरा के निर्वहन को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति पर भी विराम लगने की उम्मीद है।

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