धार में वनकर्मियों ने सीखे त्वरित रेस्क्यू, सुरक्षित हैंडलिंग और प्राथमिक उपचार के गुर
धार। जंगल से भटककर रिहायशी इलाकों में पहुंचे वन्यजीवों का रेस्क्यू अब मैदानी स्तर पर अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से होगा। इंसानों और बेजुबानों दोनों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए धार वन मंडल ने अपने जमीनी अमले को विशेष तकनीकी कौशल से लैस करने की ठोस शुरुआत की है।
इस विशेष अभियान के तहत 23 सितम्बर बुधवार को ईको सेंटर, धार में एक गहन प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत प्रशिक्षु आईएफएस एवं धामनोद के प्रभारी वन परिक्षेत्र अधिकारी पंकज चौधरी ने की। इसमें धार, मांडव और धामनोद वन परिक्षेत्र के लगभग 60 वनकर्मियों ने भाग लिया। वाइल्ड ट्रेक सर्विसेस उज्जैन के डायरेक्टर और वन्यजीव विशेषज्ञ विवेक पगारे ने मुख्य प्रशिक्षक के रूप में वनकर्मियों को रेस्क्यू की जटिल व्यावहारिक तकनीकों का सीधा प्रशिक्षण दिया।

कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने आपात स्थिति में भीड़ प्रबंधन, वन्यजीव प्रजातियों की सटीक पहचान, ऑपरेशन की पूर्व तैयारी और ट्रैकिंग के तरीके सिखाए। इसके अलावा रेस्क्यू उपकरणों का संचालन, सांपों की पहचान व सुरक्षित पकड़, रेस्क्यू किए गए जीवों का पुनर्वास और पशु प्राथमिक उपचार के साथ-साथ मानव प्राथमिक उपचार के व्यावहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
यह प्रशिक्षण जमीनी स्तर पर वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को न्यूनतम करने और रेस्क्यू के दौरान होने वाली चूकों को रोकने में निर्णायक साबित होगा। इस अभियान की अगली कड़ी में 24 सितम्बर को सरदारपुर, 25 सितम्बर को बाग और 26 सितम्बर को कुक्षी वन परिक्षेत्र में इसी प्रकार के प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिससे पूरे जिले का मैदानी अमला हर प्रकार की आपात स्थिति से निपटने में पूरी तरह सक्षम हो सकेगा।
