नगरीय निकायों का बजट का 30% अपशिष्ट प्रबंधन पर होगा खर्च
धार। शहर को स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने के दिशा में अब केवल कागजी नीतियां नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। कचरा प्रबंधन के नियमों को कड़ाई से लागू करने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है, जिससे आने वाले दिनों में शहरी स्वच्छता व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
सोमवार को कलेक्टर राजीव रंजन मीना के निर्देशों के अनुपालन में गठित सेल की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक चौधरी की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों को नगरीय निकायों में तत्काल और समयबद्ध तरीके से लागू करने की कार्ययोजना पर चर्चा की गई।
कचरे को चार भागों में करेंगे अलग
बैठक में जिला पंचायत सीईओ ने सभी नगर पालिका अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नियमों का पालन न करने वालों और विशेष रूप से थोक अपशिष्ट उत्पादकों (BWGs) पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। नए निर्देशों के तहत कचरे का 100% पृथक्करण 04 भागों (गीला, सूखा, सेनेटरी और विशेष देखभाल अपशिष्ट) में करना अनिवार्य होगा।
खुले वाहन पूर्णतः प्रतिबंधित
इसके साथ ही, सभी BWGs की डोर-टू-डोर मैपिंग की जाएगी तथा उनके लिए ऑन-साइट प्रोसेसिंग या निकायों के साथ अनिवार्य अनुबंध (MoU) करना होगा। परिवहन व्यवस्था में सुधार लाते हुए खुले वाहनों को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया है और केवल ‘क्लोज़्ड-बॉडी’ वाहनों के उपयोग के निर्देश दिए गए हैं।
प्रत्येक वार्डों में होंगे ‘RRR सेंटर’
प्रशासनिक स्तर पर वित्तीय और ढांचागत सुधारों पर जोर देते हुए निकायों को अपने कुल बजट का कम से कम 30% भाग ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक वार्ड में पुराने सामान, ई-वेस्ट, कपड़े और किताबें जमा करने के लिए ‘RRR सेंटर’ (Reduce-Reuse-Recycle) स्थापित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का EPR पंजीयन, स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के अंतर्गत पेपरलेस स्वीकृति प्रक्रिया, और शहर की नई कॉलोनियों में ‘वेस्ट हैंडलिंग ज़ोन’ घोषित करना अनिवार्य किया गया है।
इन कठोर निर्देशों का असर आने वाले समय में स्पष्ट दिखाई देगा। नियमित निगरानी, वार्ड-स्तरीय स्वच्छता रैंकिंग और बेहतर प्रदर्शन करने वाले वार्डों को मिलने वाले प्रोत्साहन से प्रतिस्पर्धात्मक स्वच्छता संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, मानव संसाधन की कमी के आंकलन और क्लोज़्ड-बॉडी वाहनों के अनिवार्य उपयोग से भविष्य में शहरों की स्वच्छता प्रणाली अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और व्यवस्थित होगी।
