Headlines

धार : आहू में किसान हत्याकांड पर अदालत का कड़ा फैसला

जमीन विवाद में भाई समेत 13 परिजनों को उम्रकैद, बेटे-बहू की गवाही बनी आधार

धार। जब अपने ही खून के प्यासे हो जाएं, तो न्याय की उम्मीद सिर्फ कानून की चौखट पर टिकती है। तिरला के ग्राम आहू में जमीन की रंजिश के चलते गेहूं के खेत में अपनों के ही हाथों जान गंवाने वाले किसान कैलाश पाटीदार को आखिरकार अदालत से पूरा न्याय मिल गया। हत्याकांड के चश्मदीद बने मृतक के बेटे और बहू की अडिग गवाही ने इस जघन्य वारदात को अंजाम देने वाले पूरे कुनबे को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

​यह वारदात 18 मार्च 2023 की दोपहर धार जिले के तिरला थाना क्षेत्र स्थित ग्राम आहू के सिलोदी खेत पर हुई थी। किसान कैलाश पाटीदार अपने बेटे आलोक और बहू रानूबाई के साथ खेत में गेहूं की कटाई करा रहे थे। इसी दौरान पुराने जमीनी विवाद को लेकर कैलाश के बड़े भाई का परिवार और अन्य रिश्तेदार वहां पहुंचे। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने एकराय होकर लाठी और धारिया से हमला बोल दिया। इस खूनी संघर्ष में सिर और पैरों में गंभीर चोटें आने के कारण कैलाश की जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि उनके बेटे और बहू घायल हो गए।

​पुलिस ने घायल आलोक और रानूबाई की शिकायत पर विष्णु, मोहित, विक्रम, राधेश्याम, विजय, भगवान, लक्ष्मी बाई, ममता बाई, घनश्याम, गौतम, कालुराम और जयेश सहित कुल 13 आरोपियों के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज किया था। मामले की जांच तत्कालीन निरीक्षक जयराम सोलंकी और उपनिरीक्षक प्रमोद चौहान ने की।

​चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश संगीता पटेल की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। अभियोजन की ओर से अतिरिक्त शासकीय लोक अभियोजक शरद पुरोहित ने 18 गवाहों के बयान, 97 अहम दस्तावेज और 16 जब्त वस्तुएं पेश कीं। वहीं बचाव पक्ष ने 7 गवाह और 55 दस्तावेज रखे। अदालत ने मृतक के बेटे-बहू के बयानों और डॉ. राहुल भामर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर सभी 13 आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और कुल 52 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। जमानत पर बाहर चल रही महिला आरोपी लक्ष्मी बाई को अदालत से ही हिरासत में लेकर धार जिला जेल भेज दिया गया, जबकि शेष आरोपी पहले से ही जेल में बंद थे।

​जमीन के छोटे से टुकड़े के लिए अपनों पर धारिया चलाने की यह रंजिश न केवल एक किसान की जान ले गई, बल्कि पूरे परिवार को हमेशा के लिए सलाखों के पीछे धकेल गई। बेटे और बहू की बिना डिगे दी गई गवाही और अदालत के इस सख्त फैसले ने यह साफ संदेश दिया है कि पारिवारिक रिश्तों की आड़ में किए गए अपराध भी कानून के शिकंजे से बच नहीं सकते।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *